JNUनई दिल्ली,  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के विरोध में संस्थान परिसर में आयोजित किए गए एक कार्यक्रम की ‘अनुशासनिकÓ जांच के आदेश दिए हैं. जेएनयू प्रशासन ने अफजल गुरु की फांसी के विरोध में परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति रद्द कर दी थी. इसके बाद भी कथित तौर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मुद्दे पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों ने जेएनयू में प्रदर्शन कर कार्यक्रम के आयोजक छात्रों को निष्कासित करने की मांग की.

मुख्य प्रॉक्टर की अध्यक्षता वाली समिति कार्यक्रम के फुटेज की जांच करेगी और वहां मौजूद रहे लोगों से बात करेगी. रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय उचित कार्रवाई करेगा. ‘अधूरी सूचनाÓ के बारे में बताते हुए जेएनयू के रजिस्ट्रार बी जुत्शी ने कहा, अनुमति के लिए किए गए अनुरोध में कहीं भी यह नहीं लिखा गया था कि अफजल गुरु पर कार्यक्रम आयोजित किया जाने वाला है.

उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं. देश के विघटन के बारे में कोई बात राष्ट्रीय कैसे हो सकती है?’

कार्यक्रम के छात्र आयोजकों ने पूरे परिसर में मंगलवार को पोस्टर चिपका कर छात्रों को आमंत्रित करते हुए कहा था कि वे ‘अफजल गुरु और मकबूल भट्ट
की न्यायिक हत्या’ के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर स्थित साबरमती ढाबा पर आयोजित विरोध मार्च में हिस्सा लें. आह्वान किया गया था कि कश्मीरी प्रवासियों के ‘संघर्ष’ के प्रतिएकजुटता प्रदर्शित करें. एबीवीपी के सदस्यों ने इस कार्यक्रम पर अपना विरोध जताया और कुलपति को पत्र लिखकर कहा कि किसी शैक्षणिक संस्था में ऐसे मार्च नहीं होने चाहिए.

इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मार्च को रद्द करने का आदेश जारी किया, क्योंकि उन्हें ‘आशंका’ थी कि इससे परिसर में शांति भंग हो सकती है.
लेकिन आयोजकों ने अनुमति रद्द होने के बाद भी कार्यक्रम का आयोजन
किया. उन्होंने इस मुद्दे पर प्रदर्शन की बजाय एक सांस्कृतिक कार्यक्रम, कला
व फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया. इससे आक्रोशित एबीवीपी सदस्यों ने
कुलपति कार्यालय के बाहर इक_ा होकर नारेबाजी की और छात्रों के निष्कासन की मांग की. जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव सौरभ कुमार ने कहा, ‘लोकतंत्र के मंदिर पर हमला करने वाले अफजल गुरु पर यहां कैसे कोई कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है? हम इसे आयोजित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.’

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