कोलकाता. अगर फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली की गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम भारतीयों को अपने घरों में पड़ा सोना बाहर निकालने के लिए आकर्षित करने में नाकाम रही तो देश में अवैध रूट से गोल्ड की एंट्री पर अंकुश नहीं लग पाएगा। अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास 20,000 टन गोल्ड है।

गोल्ड इंपोर्ट पर 10 पर्सेंट ड्यूटी लगती है। इंडस्ट्री की ओर से लगातार मांग किए जाने के बावजूद जेटली ने आम बजट में यह ड्यूटी घटाने का प्रस्ताव नहीं किया। इससे गोल्ड की अवैध सप्लाई बढ़ाने की आशंका है।

गीतांजलि ग्रुप के चेयरमैन मेहुल चोकसी ने कहा, फाइनेंस मिनिस्टर ने देश में ब्लैक मनी पर लगाम लगाने के लिए बहुत से उपायों की घोषणा की है, लेकिन उन्होंने देश में गोल्ड की तस्करी के बड़े मुद्दे को अनदेखा कर दिया। अगर इंपोर्ट ड्यूटी कम नहीं की जाती तो अवैध रूट से गोल्ड आना जारी रहेगा और ब्लैक मनी भी इसके जरिए देश में आने का रास्ता तलाश सकती है।ज्

वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारत में 2014 में लगभग 200 टन गोल्ड अवैध रूट के जरिए आया था। गोल्ड ट्रेडर्स ने बताया कि पिछले एक वर्ष में अवैध तरीके से आने वाले गोल्ड के मुकाबले ऑफिशियल गोल्ड की लैंडिंग कॉस्ट 20 पर्सेंट बढ़ी है क्योंकि कड़े इंपोर्ट नॉर्म्स के चलते प्रीमियम में इजाफा हुआ है। चोकसी ने कहा कि गोल्ड की अनऑफिशियल सप्लाई की वैल्यू लगभग 10 अरब डॉलर होने का अनुमान है। इससे फॉरेन एक्सचेंज इनफ्लो के साथ ही कस्टम्स ड्यूटी के तौर पर मिलने वाले रेवेन्यू का भी नुकसान हुआ है।
गोल्ड की स्मगलिंग और इसके जरिए आने वाली ब्लैक मनी को तभी कम किया जा सकता है कि जब सरकार इंपोर्टेड गोल्ड पर देश की निर्भरता कम करे। जेटली की गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम इस दिशा में एक कदम है। गोल्ड ट्रेडर्स का कहना है कि अगर यह स्कीम आकर्षक हुई तो इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल सकता है। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के चेयरमैन हरेश सोनी ने कहा, च्हम स्कीम की डिटेल्स का इंतजार कर रहे हैं।इससे पहले इंडस्ट्री ने सरकार को गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत एक बैंक एकाउंट खोलने का प्रपोजल दिया था, जिसमें गोल्ड अधिकतम तीन वर्ष की अवधि के लिए रखा जा सके और इस पर मौजूदा इंटरेस्ट रेट के मुताबिक इंटरेस्ट दिया जाए। जब एकाउंट मैच्योर होगा तो इंटरेस्ट रुपये में नहीं, बल्कि गोल्ड में दिया जाएगा और इनवेस्टर के पास एकाउंट में ज्यादा गोल्ड होगा।

बैंक इस गोल्ड को ज्वैलर्स को उधार दे सकते हैं या इसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पास रखा जा सकता है। इससे बैंकों के लिए लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर होगी। इंडस्ट्री का मानना है कि देश में बने गोल्ड कॉइन पेश करना भी एक अच्छा कदम है।

 

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