नयी दिल्ली,  जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित करने (इंसॉल्वेंसी) की प्रक्रिया पर रोक के उच्चतम न्यायालय के कल के आदेश में संशोधन को लेकर आईडीबीअाई बैंक ने आज शीर्ष अदालत का रुख किया, जिसने सुनवाई के लिए 11 सितम्बर की तारीख तय की है।

आईडीबीआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताभ राय अौर न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ के समक्ष दलील दी कि शीर्ष अदालत के कल के स्थगनादेश से कंपनी जेपी इंफ्राटेक एक बार फिर से इसके प्रोमोटरों के हाथों में चल गयी है।

श्री सिंघवी ने पीठ से अपने आदेश में संशोधन का अनुरोध किया हालांकि घर खरीदारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने श्री सिंघवी के अनुरोध का पुरजोर विरोध किया। बाद में न्यायालय ने आईडीबीआई के अनुरोध पर विचार के लिए 11 सितम्बर की तारीख मुकर्रर की।

न्यायालय ने हजारों घर खरीदारों को फौरी राहत प्रदान करते हुए जेपी इंफ्राटेक को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा इंसॉल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश पर कल रोक लगा दी थी। न्यायालय ने चित्रा शर्मा एवं अन्य खरीदारों की याचिका पर जेपी इंफ्राटेक को नोटिस भी जारी किया था। खरीदारों का दावा है कि उन्होंने 90 प्रतिशत राशि का भुगतान जेपी को कर दिया है, लेकिन उन्हें आज तक फ्लैट पर कब्जा नहीं दिया गया है।

आईडीबीआई बैंक के 500 करोड़ रुपये के बकाये की वसूली के लिए एनसीएलटी में इंसॉल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन घर खरीदारों ने शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका दायर की थी। इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के तहत सेक्योर्ड क्रेडिटर्स के वित्तीय हितों को अनसेक्योर्ड क्रेडिटर्स के हितों पर तरजीह दी जाती है। फ्लैट खरीददारों ने यह दलील दी है कि यदि इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू हो जाती है तो न तो उन सभी को फ्लैट ही मिल पायेगा और न ही उनके पैसे वापस होंगे।

श्री सिन्हा ने दलील दी थी कि जेपी की 27 हाउसिंग परियोजनाओं में करीब 32 हजार क्रेताओं ने फ्लैट खरीद के लिए पैसे लगाये हैं और इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के कारण इन खरीदारों के हित अधर में लटक गये हैं। एनसीएलटी ने 10 अगस्त को जेपी इंफ्राटेक की इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिये थे।

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