नई दिल्ली. साल 2015 की दूसरी छमाही में शादियों के लिए शुभ माने जाने वाले दिनों की संख्या करीब 40 फीसदी कम है. इससे गोल्ड ज्वैलरी इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ सकता है. इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स का कहना है कि गोल्ड की कीमतों के हिसाब से इसकी डिमांड 15 से 25 फीसदी तक कम हो सकती है.

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के स्पोक्सपर्सन केतन श्रॉफ ने कहा, अगर गोल्ड के दाम 27,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के इर्दगिर्द बने रहते हैं तो सेल्स 25 फीसदी घट जाएगी. हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर गोल्ड की कीमतें गिरकर 25,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ जाती हैं तो ज्वैलरी की सेल्स में होने वाली गिरावट 10 से 15 फीसदी ही रहेगी.

यह इस साल के पहले तीन महीनों में दिखाई दिए ट्रेंड के पलटने का संकेत देता है. पिछले साल के मुकाबले जनवरी से मार्च तक गोल्ड की डिमांड 15 फीसदी बढ़ी और यह 191.7 टन पर पहुंच गई. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने इस ट्रेंड की वजह पॉजिटिव सेंटीमेंट और मुफीद पॉलिसी बदलाव बताए थे.

पी एन गाडगिल ज्वैलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ गाडगिल ने बताया, शादियों के दिनों की संख्या कम होने का असर निश्चित तौर पर ज्वैलरी सेल्स पर दिखाई देगा. हालांकि, हम अधिक महीने पर अपनी उम्मीदें टिकाए हुए हैं, जो 15 जुलाई को शुरू हो रहा है. इस दौरान ससुर अपने दामाद को गोल्ड आइटम गिफ्ट करते हैं. उम्मीद है कि यह पीरियड ज्वैलरी ट्रेड को कुछ राहत मुहैया कराएगा.
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के डायरेक्टर बछराज बामलवा ने हालांकि कहा कि शादियों के कम मुहूर्त का असर ज्वैलरी सेल्स पर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा, च्शादी का फैसला कर चुके लड़के और लड़कियां कम दिनों के बावजूद इस अहम मौके को टालेंगे नहीं. हो सकता है कि एक ही दिन कई-कई शादियां हों.ज् हालांकि उन्होंने कहा कि 15 सितंबर तक सेल्स सुस्त ही रहेगी.
ओवरसीज मार्केट्स में इनवेस्टर्स बुलियन आधारित एक्सचेंज-ट्रेडेड प्रोडक्ट्स में अपनी होल्डिंग घटा रहे हैं और यह 2009 के बाद सबसे लो लेवल पर पहुंच गई है. यूएस से लेकर चीन तक स्टॉक मार्केट्स में चल रही तेजी की वजह से गोल्ड की डिमांड पर बुरा असर पड़ रहा है. अमेरिका में इंटरेस्ट रेट्स में इजाफे की संभावनाओं को देखते हुए डॉलर मजबूत हो रहा है. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ईटीएफ में होल्डिंग्स मंगलवार को 5.45 टन या 0.3 फीसदी घटकर 1,594.08 टन पर आ गई. दिसंबर 2012 में गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग 2,632.52 टन के साथ रिकॉर्ड पर पहुंच गई थी. इसके बाद इसमें 39 फीसदी की गिरावट आई. 2013 में यह 33 फीसदी घट गई जबकि पिछले साल गोल्ड ईटीएफ की गोल्डिंग में 9.3 फीसदी और गिरावट दर्ज की गई.

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