नई दिल्ली,  सरकारी बैंकों की तस्वीर बदलने के लिए आयोजित ज्ञान में बैंकों के विलय, मैनेजमेंट में सुधार, एनपीए की रिकवरी जैसे कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई और सुधार के लिए रोडमैप पर विचार किया गया। लेकिन सुधार पर हुए इस मंथन से क्या सरकारी बैंकों के हालात में सचमुच कोई बदलाव आएगा, क्या बैंक एनपीए के बोझ से मुक्त होकर ग्रोथ की राह पकड़ पाएंगे?

बैंक संगम में वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने बैंक प्रमुखों को बेहद कड़ी फटकार लगाई है। इस ज्ञान संगम में 10 बड़ी बातें निकल कर आईं। सबसे पहले तो ये कहा गया कि बड़े कर्जदारों का कर्ज माफ नहीं होगा, दूसरे बड़े डिफॉल्टर्स पर शिकंजा कसने से कर्ज वसूली में तेजी आयेगी। इस संगम में

एसएआरएफएईएसई एक्ट में बदलाव का सुझाव रखा गया, बैंकों के विलय पर एक्सपर्ट कमिटी बनाने का सुझाव भी रखा गया। इसके अलावा बैंक कर्मचारियों के लिए इसोप पर विचार करने का निर्णय लिया गया और प्राइवेट बैंकिंग की तरह प्लेसमेंट के लिए एक्सपर्ट पैनल बनाने पर विचार करने का निर्णय लिया गया। ज्ञान संगम में बैंक बोर्ड ब्यूरो पर भी चर्चा हुई ।

बैंक ज्ञान संगम में डीआरटी को देश का पहला ऑनलाइन कोर्ट बनाने पर भी चर्चा हुई। डीआरटी एक्ट में फैसले जल्दी लेने की कोशिश है। इसके अलावा इस संगम में एआरसी को एसेट क्वालिटी में शामिल करने पर भी चर्चा हुई। दूसरे ज्ञानसंगम के समापन के दौरान हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री ने कहा कि इस ज्ञान संगम में बैंकों की हालत पर कई सुझावों पर सहमति बनी है। बैंकों के विलय से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में ज्यादा नहीं मजबूत बैंकों की जरूरत है। वित्त मंत्री ने साफ किया है कि सरकार किसी का भी लोन माफ नहीं करेगी।

बैंकिंग एक्सपर्ट शिंजिनी कुमार का कहना है कि विलय से बैंकों की सेहत में सुधार लाया जा सकता है। रिकवरी को लेकर बैंकों के पास बहुत अधिकार हैं। बैंकों के कदम उठाने के नतीजे आ भी रहे हैं। वहीं एसबीआई के पूर्व एमडी ए कृष्णकुमार का कहना है कि एनपीए के लिए सिर्फ बैंकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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