मध्यप्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने राज्य शासन की ओर से यह घोषणा कर कि सरकार की प्रदेश में आंगनबाडिय़ों में कार्यरत कार्यकर्ता व सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित करने तथा उन्हें तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग का दर्जा देने की कोई योजना नहीं है.

सरकार यहां पर खुद ही कर्मचारियों का शोषण कर रही है. ये लोग फील्ड में पूरी तौर पर सरकारी काम कर रहे हैं लेकिन सरकार इनसे काम तो ले तो पूरा ले रही है लेकिन उन्हें सरकारी कर्मचारी नहीं बनाकर शासकीय लाभों से वंचित रख रही है.

इन्हें भी जो भी पारिश्रमिक दिया जा रहा है उसे मानदेय माना जाता है. सरकार इन्हें वेतनमान के अलावा महंगाई भत्ता, भविष्य निधि पेन्शन, ट्रांसफर व मेडिकल की सभी सुविधाओं से वंचित कर रही है.

यही हाल संविदा शिक्षकों के मामले में भी हो रहा है. किसी भी वेलफेयर स्टेट की परिभाषा में शासन का इनके प्रति रवैया शोषण और ज्यादती का ही है. ये लोग निम्न वर्ग के सेवक जरूर हैं लेकिन फील्ड में जनसेवा का बहुत बड़ा काम कर रहे हैं.

आंगनबाड़ी बाल शिक्षा, मध्याह्नï भोजन, स्व-सहायता समूहों का बहुत ही समाज उपयोगी का कार्य है. इन्हें निश्चित तौर पर शासन के तृतीय व चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों का दर्जा फौरन दिया जाना चाहिए.

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