25kk13पर्थ, 25 फरवरी. टीम इंडिया ने अभ्यास के उबाऊ पुराने तरीकों को तजकर 75 मिनट के सत्र में अनूठे तरीकों से अभ्यास किया और क्रिकेटरों ने इसका जमकर मजा भी लिया. ऐसा नहीं है कि अभ्यास के तौर तरीकों में आमूलचूल बदलाव किया गया लेकिन इनमें कुछ बदलाव करके इन्हें रोचक बनाया गया.

फील्डिंग के दौरान दो तरीकों पर सभी का ध्यान गया. एक ‘डमी कैचÓ सत्र था जो खिलाडिय़ों के रिफ्लैक्स एक्शन बेहतर करने के मकसद से किया गया और दूसरा ‘फील्डिंग मैच’ था जिसमें दो टीमें बनाई गई थी और विजेता का चयन इस आधार पर किया गया कि किसने प्लास्टिक के स्टम्प पर सबसे ज्यादा सीधे थ्रो मारे हैं. पहला तरीका काफी रोचक था. करीबी कैच लपकने के लिये रिफ्लैक्सेस बेहतर करने के लिए टीमें टेनिस रैकेट और गेंदें इस्तेमाल करती रही हैं.
सहायक कोच संजय बांगड़ ने हालांकि चार समूहों में खिलाडिय़ों को बांटकर आम टेनिस गेंद सत्र से कुछ अलग किया. यहां चार फील्डरों का समूह बांगड़ से दस मीटर की दूरी पर खड़ा था. बांगड़ जैसे ही अपने रैकेट से गेंद को मारते पहला फील्डर ‘डमीÓ होता और बाकियों को कैच लपकना था.
टेनिस गेंद के इस्तेमाल की वजह से कैच काफी उंचे आ रहे थे. कैच लपकने के लिए खिलाड़ी को एक सेकंड से भी कम समय मिलता था क्योंकि आगे खड़ा खिलाड़ी ऐन मौके पर हटता था. सुरेश रैना, रविंद्र जडेजा और विराट कोहली ने इस सत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया.

अगला सत्र ‘फील्डिंग मैच’ का था जिसमें खिलाडिय़ों को दो समूहों में बांटा गया. एक समूह में रैना, कोहली, शिखर धवन और स्टुअर्ट बिन्नी जैसे खिलाड़ी थे तो दूसरे में आर अश्विन और जडेजा जैसे खिलाड़ी. आठ-आठ खिलाडिय़ों के दो समूहों को एक दूसरे से 10 मीटर की दूरी पर समांतर खड़ा किया गया. दोनों सहायक कोच संजय बांगड और आर श्रीधर अपने अपने समूह के आगे खड़े थे. आम तौर पर गेंद उठाकर थ्रो करने का सत्र होता है लेकिन इस बार कुछ बदलाव था. दोनों कोच सीधे मारने की बजाय अपने समूहों के सामने अलग अलग कोण से शॉट्स खेल रहे थे.

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