yunrajकोलकाता, लंबे इंतजार के बाद अगले वर्ष जनवरी में होने वाले आस्ट्रेलिया दौरे के लिये भारतीय ट्वंटी-20 टीम में शामिल किये गये मध्यक्रम के धाकड़ बल्लेबाज युवराज सिंह ने टीम से बाहर बैठने को अपने करियर का सबसे बुरा दौर बताया।

यहां आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने आये युवराज ने कहा,“ टीम से लंबे समय तक बाहर रहने से ज्यादा बुरा उनके लिये कुछ नहीं हो सकता था। यह एक बेहद ही कठिन दौर था लेकिन मैंने हौसला नहीं छोड़ा था और मुझे टीम में वापसी की पूरी उम्मीद थी।”

टीम इंडिया की ओर से आखिरी मुकाबला 2014 में विश्व ट्वंटी-20 फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ ढाका में खेलने वाले 34 वर्षीय युवराज विजय हजारे ट्राफी में अपने तूफानी प्रदर्शन से अंतत: चयनकर्ताओं का भरोसा जीतने में कामयाब रहे। उन्होंने टूर्नामेंट में अब तक पांच मैचों में 85.25 के औसत से और 103.64 के स्ट्राइक रेट से 341 रन बनाये और अपने दम पर पंजाब को क्वार्टरफाइनल में पहुंचा दिया।

युवी ने अपने आगामी प्रदर्शन के बाबत कहा,“ जब आप देश का प्रतिनिधित्व करते हैं तो आप पर प्रशंसकों की अपेक्षाओं दबाव होता बढ़ जाता है। लोग आपसे पुराने प्रदर्शन की अपेक्षाएं करते हैं। वो आपसे पुराने प्रदर्शन को दोहराने की अपेक्षा करते हैं।”

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