टू-जी स्पेक्ट्रम जिसे प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह की यू.पी.ए. सरकार का अब तक का देश का सबसे बड़ा- एक लाख 76 हजार करोड़ रुपयों का घोटाला कहा जा रहा- उसे सी.बी.आई. की स्पेशल कोर्ट ने यह फैसला देकर कि ऐसा कोई घोटाला हुआ ही नहीं.

देश की राजनीति और प्रशासन में भारी हलचल मचा दी. देश में पहली बार इस मामले में सी.ए.जी. की आडिट रिपोर्ट को इस तरह बेबुनियाद बताया गया है. इस मामले के सभी 17 अपराधी जिनमें प्रमुख उस काल के केंद्रीय संचार मंत्री श्री ए. राजा, जो डी.एम.के. कोटे से यूपीए की साझा सरकार में थे, और डी.एम.के. की राज्यसभा सांसद और डी.एम.के. नेता श्री करुणानिधि की पुत्री श्रीमती कनि मौझी को बरी कर दिया.

हर मुकदमे में सबसे खास यह रहता है कि अभियुक्त बरी हो गये और इस मामले में सभी 17 के बरी होने के अलावा यह सबसे प्रमुख हो गया कि कोर्ट ने फैसले में जो कहा है वह बहुत ही गंभीर मामला बन गया है. कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई घोटाला ही नहीं हुआ और सभी इसे देश का सबसे घोटाला कहते रहे.

इस मामले में दूरसंचार मंत्रालय की बात किसी ने नहीं सुनी. कोर्ट के सामने जो दलील, सबूत और दस्तावेज दिये गये उनमें कोई तारतम्य ही नहीं था. एक भी बात ऐसी कोर्ट के सामने नहीं लायी गयी जिससे कुछ भी साबित होता हो. केवल गवाहों के बयानों के आधार पर पूरा केस बनाया और चलाया और इनकी गवाहियां भी बेतुकी थीं. दूरसंचार अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है.

यह मामला संविधानिक प्राधिकारी सी.ए.जी. (कंट्रोलर एंड आडीटर जनरल) की रिपोर्ट से पैदा हुआ. जो उस समय श्री विनोद राय थे. सी.ए.जी. रिपोर्ट में कहा गया कि 2-जी स्पेक्ट्रम में सरकार ने नीलामी की पद्धति नहीं अपनाकर ”पहले आओ पहले पाओ” की नीति व फैसला कर मनमाने ढंग से स्पेक्ट्रम बांट दिये. इससे देश को 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपयों का भारी नुकसान हुआ. रिपोर्ट में इससे भारी लेन-देन व भ्रष्टाचार होने के संकेत दिये गये.

उस समय भारतीय जनता पार्टी संसद में प्रमुख विपक्षी पार्टी थी. उसने इस मसले को पूरी ताकत से उठाया और जे.पी.सी की मांग पर संसद का चलना ठप्प कर दिया. उन्हीं दिनों कोल ब्लाक आवंटन में भी भारी भ्रष्टाचार का मामला भी बड़े जोर से उठा था. भारतीय जनता पार्टी ने इन तथाकथित घोटालों को लगातार राजनीति में गर्माये रखा. 2009 के लोकसभा चुनाव प्रचार में इसे खूब उछाला जाता रहा.

राज्यसभा में कांग्रेस के नेता विपक्ष श्री गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में इस फैसले पर मोदी सरकार को जमकर घेरा. सदन में भारी हंगामा हुआ- सदन बार-बार स्थगित हुआ. श्री आजाद ने कहा इसी फर्जी घोटाले के कारण आप (भाजपा) सरकार में आये और हम सरकार से विपक्ष बन गये.

प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने कहा कि 2-जी स्पेक्ट्रम में न तो कोई भ्रष्टाचार हुआ और न ही कोई राष्ट को नुकसान (लॉस) हुआ. पूरा कांड ही एक राजनैतिक प्रोपेगेंडा और साजिश था.

सी.ए.जी. की 2007-08 की रिपोर्ट पर यह मामला उठा था और 2011 से यह मुकदमा सी.बी.आई. कोर्ट में चल रहा था.यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया था. जहां कोर्ट ने ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के तहत किये गये सभी स्पेक्ट्रम आवंटनों को रद्द करके सरकार से इन्हें नीलाम करने को कहा था. सी.बी.आई. को निर्देश दिया था कि वे इस मामले में आगे जांच कराएंं.

सी.बी.आई ने दूरसंचार मंत्री श्री ए. राजा एवं सांसद कनीमोझी के अलावा 15 अन्य पर भारतीय दंड विधान (आई.पी.सी.) और प्रिवेन्शन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, फोरजरी, झूठे दस्तावेजों को सही मान इस्तेमाल करना, शासकीय पदों का दुरुपयोग, शासकीय व्यक्तियों का आपराधिक आचरण और रिश्वत लेने के आरोप लगे थे.

इस फैसले की गंभीरता इसमें भी है कि सी.बी.आई. इन 17 व्यक्तियों में से किसी एक के खिलाफ एक भी अपराध, दुराचार, कदाचरण, रिश्वत लेना, पद का दुरुपयोग, आपराधिक षड्यंत्र आदि साबित नहीं कर पायी. यह मामला अपने आप में एक मिसाल है.

सी.बी.आई. इस मामले में बहुत ही बुरी और हीन स्थिति में आ गयी है. इससे यह लगता है कि यह मुकदमा सी.बी.आई. की भत्र्सना (सेन्सर) बन गया और सी.ए.जी. जिसकी रिपोर्टों को पूरा का पूरा सच माना जाता है उसे भी पूरा का पूरा झूठा माना गया. देश का सबसे बड़ा घोटाला कहा जाने वाला मामला कहीं से भी घोटाला नहीं था.

सी.बी.आई. मामले को आगे अपील में दिल्ली हाईकोर्ट ले जा रही है और यह भी निश्चित ही समझा जाए कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जायेगा. केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने यह कह भी दिया है कि सरकार अपील में जा रही है.

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