deepaरियो डि जेनेरो,  ओलंपिक खेलों के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट होने का गौरव हासिल करने वाली दीपा करमाकर रियो में अपनी स्पर्धा में पदक पाने से चूक गईं लेकिन इस अनुभव ने उनके हौंसलों को पंख दे दिये हैं और उन्होंने भरोसा जताया है कि टोक्यो ओलंपिक 2020 में वह देश के लिये पदक जरूर लेकर आएंगी।

दीपा रियो ओलंपिक की जिमास्टिक की वाॅल्ट स्पर्धा में रविवार को चौथा स्थान हासिल कर पदक पाने से चूक गई थीं लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से भारत के खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा लिया।

दीपा ओलंपिक में 52 वर्षों में उतरने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट और रियो के लिये क्वालीफाई करने वाली एकमात्र जिमनास्ट थीं।

त्रिपुरा की दीपा ने 15.066 के औसत स्कोर के साथ चौथा स्थान हासिल किया।
उन्होंने अपने मुकाबले के बाद कहा“ जिन तीन खिलाड़ियों को पदक मिला वे निश्चिततौर पर मुझसे बेहतर थीं।

लेकिन यह मेरे पहले ओलंपिक हैं और मैं अपने अनुभव से खुश हूं।
मैंने जो कुछ भी ट्रेनिंग में सीखा था उसे लागू किया।

लेकिन देश को पदक नहीं दिला पाने से मैं दुखी हूं।

” 23 वर्षीय दीपा ने लेकिन विश्वास जताया कि वह अगले ओलंपिक में पदक जरूर लेकर आएंगी।

उन्होंने कहा“ मैं भविष्य में बेहतर करने की कोशिश करती रहूंगी और 2020 के टोक्यो ओलंपिक में अपने देश के लिये पदक लाने की पूरी कोशिश करूंगी।
” सबसे खतरनाक माने जाने वाले प्रोदुनोवा वोल्ट में दीपा ने अपने दूसरे प्रयास में अच्छा स्कोर हासिल किया लेकिन वह 0.150 के अंतर से पदक से चूक गईं।

उन्होंने कहा“ जीतना और हारना खेल का हिस्सा होता है।

मैं प्रोदुनोवा में अच्छा करने को लेकर आश्वस्त थी।

मैं अपने दोनों वोल्ट अच्छे से करना चाहती थी।

मैं इस बार रजत या कांस्य की ही सोच रही थी लेकिन अगली बार तो मेरा लक्ष्य सिर्फ स्वर्ण ही होगा और फिर शायद मुझे रजत या कांस्य ही मिल जाए।
लेकिन मैं पूरे देश की मेरे लिये दिये गये समर्थन की आभारी हूं।

 

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