लम्बी दूरी के सड़क परिवहन में एक बड़ी सहूलियत यह कर दी गई है कि 14 राज्यों मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्टï्र, ओड़ीसा, मणिपुर, तमिलनाडु व तेलंगाना में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर 62 टोल प्लाजा खत्म कर दिये हैं. केन्द्र सरकार ने इन परियोजनाओं में लगी पून्जी की लागत टैक्स से निकल आने पर और जनहित को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है.

आमतौर पर बड़ी सड़क परियोजनाओं व सड़क पुलों पर जिन पर बहुत ज्यादा लागत आती है और सड़क परिवहन भी बहुत ज्यादा होता है उनकी लागत निकालने के लिए सरकार ऐसे मार्गों प्रवेश व निकास के स्थानों पर टोल टैक्स लगाकर लागत निकालती है. इसमें यह निहित होता है कि जब टोल टैक्स से लागत निकल आयेगी तब से टोल टैक्स नाके खत्म कर दिये जायेंगे, लेकिन आमतौर पर यही देखा गया कि एक बार जो टोल टैक्स नाका बना दिया गया उसके बारे में कभी भी यह बताया नहीं जाता था कि उसकी लागत कितनी आयी थी जिसे टोल टैक्स के जरिये वसूल करना है और न ही कभी यह बताया गया कि नाका प्रारंभ होने से किस साल कितनी रिकवरी हो चुकी और कितनी बाकी है. हिसाब के इसी गोलमाल से टोल नाके एक बार शुरु हुए तो चलते ही रहते थे. इन नाकों पर लड़ाई-झगड़े व बेजा वसूली और टैक्स चोरी भी बहुत होती थी. जब चोरी रोकने के लिये सरकार ने इन्हें निजी ठेकों पर दे दिया तो वसूली में ठेकेदार के स्टाफ द्वारा गुन्डागिरी, मारपीट के झगड़ों की खबरें आती रहती थीं. इस समय एक साथ 62 टोल टैक्स नाकों को खत्म करके एक बड़ी पहल जनहित में की गई है एक तो अब यह बात प्रचलन में आ जायेगी कि जहां भी पुल, सड़क बनेगी उनकी लागत बतायी जायेगी और पूरी रिकवरी होने पर उन नाकों को खत्म भी किया जायेगा.

कोलकाता में ‘हावड़ा ब्रिजÓ के नाम से हुगली नदी पर बना पुल भारत का एक विश्वख्याति का लैंडमार्क है. यह माना गया था विश्व में सबसे ज्यादा यातायात हावड़ा ब्रिज और लन्दन में टैक्स ब्रिज पर है. प्रधानमंत्री श्री नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री काल में कोलकाता में हावड़ा ब्रिज पर यातायात दबाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने पूंजी लगाकर एक और नया पुल विवेकानंद ब्रिज बनवाया. इस पर टोल टैक्स नाके बनाये गये थे. श्री नरसिम्हा राव ने तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री ज्योति बसु से पूछा था कि इस ब्रिज पर टोल टैक्स क्यों लगाया है. इसके प्रतिउत्तर में श्री बसु ने कहा था कि आपका (केन्द्र सरकार) रुपया लौटाना है. तब श्री नरसिम्ह रावा को यह ज्ञात हुआ कि उस पुल को केन्द्र ने नहीं बनवाया है बल्कि राज्य को ब्याज पर पूंजी लागत दी थी.

आमतौर पर पहले यह टोल नाके पुलों पर ही लगाये जाते थे लेकिन अब सड़कों के सेक्शनों पर भी टोल टैक्स लगा दिये गये हैं. अब तो यह हालत हो गयी है जैसे सड़कें वाहनों को किराये पर दी जा रही हैं. अब यह सड़क टैक्स आवागमन पर औरंगजेब का ‘जजिया टैक्सÓ लगने लगा है.

यह सरकारों के बुनियादी (बेसिक) काम और यह मूलभूत दायित्व (फन्डामेन्टल) होता है कि वह सड़कें, अस्पताल व स्कूल बनाये. इन पर टैक्स लगाना बहुत ही अनुचित लगता है जैसे सरकारें जनता की न होकर धंधा-रोजगार करने वाली कंपनियां हों. जब सरकारें आम जनता से तमाम चीजों पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष टैक्स लगातार हर क्षण हर पल वसूलती है- वह किस बात के लिये होता है. मध्यकालीन इतिहास में शेरशाह सूरी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह बतायी गयी है कि उसने भारत की पहली सबसे बड़ी ‘ग्रान्ट ट्रंक रोडÓ बनायी थी जो इतनी मजबूत है कि वह आज तक कायम है. इसके लिए कहा जाता है कि ग्रान्ट ट्रंक रोड कमाल है और मिसाल है.

भारत की केन्द्र व राज्य सरकारों को शेरशाह सूरी की तरह जनकल्याण के निर्माण अपना कर्तव्य समझ के करना चाहिए. सड़कों-पुलों-कम्पनियों की तरह आमदनी बनाना क्या होता है?