देश में माल वाहक ट्रकों की हड़ताल पांचवें दिन में पहुंच गयी है और इसके शीघ्र समाधान होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं. इसका नतीजा यही हो रहा है कि हड़ताल और सभी चीजों के दाम आपूर्ति में अभाव के कारण बढ़ातेे जा रहे है. लेकिन इससे ट्रक मालिकों का कमाई में और केंद्र व राज्य सरकारों का टैक्स की आमदनी से कमी के रूप में घाटा बढ़ता जा रहा है. इस सबसे ऊपर यह है कि लोगों के आम जीवन में इससे परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं.

पूरा विवाद टोल टैक्स और टोल टैक्स नाकों को लेकर है. ट्रक आपरेटरों की मांग है कि इन दोनों को खत्म किया जाए और टीडीएस को सरल किया जाना चाहिए.
सड़क यातायात में दो बड़ी जरूरतें होते हुए भी ये बड़ी बाधाएं व परेशानी की होती है. एक तो है नगरीय संस्थाओं का चुंगी आक्ट्राय नाका और दूसरा टोल टैक्स. आक्ट्राय नगरीय (म्युनिसिपल) संस्थाओं की सबसे बड़ी और रोज आने वाली आमदनी होती है. बाकी संपत्ति, सफाई, पानी आदि अन्य टैक्स मासिक या सालाना के आधार के होते है. लंबी दूरी सड़क यात्रा में अनेकों नगर पड़ते हैं और हर जगह आक्ट्राय चुकाते जाना गति में बड़ी बाधा और खर्चें में बड़ा भार होता था.

वाहनों को ऐसे म्युनिसिपल नाकों पर काफी रुकना पड़ता था. लगातार यह मांग बनी रहती है कि इन आक्ट्राय को खत्म किया जाए. नगरीय निकायों में चुंगी की कमाई में ही भारी चोरी, भ्रष्टïाचार व कर बचाना (इवेजन) होता था. देश में इसे केवल मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री श्री श्यामाचरण शुक्ल ने ही करके दिखा दिया बाकी अन्य सभी राज्यों में अभी यह कायम है. श्री शुक्ल ने इसकी व्यवस्था भी बड़ी सुचारू रूप से कर दी जो अभी तक बहुत अच्छे ढंग से चल रही है. राज्य सरकार नगरीय निकायों को आक्ट्राय की औसत आमदनी के आधार पर- जिसे लगातार कुछ सालों बाद बढ़ाया भी जाता है. एक निश्चित रकम आक्ट्राय क्षतिपूर्ति में देती है. इससे आक्ट्राय की चोरी भ्रष्टïाचार खत्म हो गया, पूरी आमदनी राज्य सरकार में आने लगी और नाकों को चलाने का खर्चा कम हो गया. सड़क यातायात बिना अकारण रुके गतिमान हो गया.

टोल टैक्स किसी बड़े सड़क निर्माण कार्य- पुल या नई सड़क निर्माण पर उस समय तक लगता जाता है जब तक उस कार्य की लागत वसूल न हो जाये. उसके बाद उसे खत्म कर दिया जाता है.
अब मोदी सरकार के सड़क परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी ने टोल टैक्स को भी म्युनिस्पिल आक्ट्राय की तरह स्थाई रूप देने की राजनैतिक व प्रशासनिक धृष्टïता करने जा रहे हैं. उन्होंने तर्क दिया है कि विकास के लिये नई सड़कों का निर्माण और वर्तमान सड़कों का मेन्टेनेन्स लगातार होने वाला विकास कार्य का बड़ा खर्चा है इसलिये टोल टैक्स को भी स्थाई किया जाए.

दूसरी ओर देश में उद्योग-व्यापार में ट्रक ट्रांसपोर्ट की सबसे अहम् और सर्वाधिक भूमिका है. वस्तुओं के मूल्यों और मूल्य निर्धारण में ट्रांसपोर्ट का खर्चा सबसे बड़ा होता है. इसकी घट बढ़ से इसी तरह का प्रभाव मूल्यों पर होता है. अभी ट्रकों की हड़ताल चल रही है. उद्योगों में बना माल रुका पड़ा है और निर्माण के लिये कच्चा माल पहुंच नहीं रहा है. बाजारों में सभी वस्तुओं काअभाव बढ़ता जा रहा है और उसी वजह से मूल्यों में भी बढ़ोत्री होती जा रही है.

निस्संदेह ट्रक आपरेटरों की हड़ताल बिलकुल जायज है और देश के विकास के हित में है कि ट्रक ट्रांसपोर्ट पर घुमा फिरा कर कराधान न बढ़ाया जाए. टोल टैक्स और टोल टैक्स नाके खत्म किये जायें. जो भी लिया जाए वह साल में एक बार किसी एक पाइंट पर लिया जाए. ऐसा कोई कराधान नहीं होना चाहिए कि सड़कों पर रुकते जाओ और टैक्स अदा करो. ट्रक ट्रांसपोर्ट में गति भी बनी रहना बहुत ही आवश्यक है.

श्री गडकरी को श्री श्यामाचरण शुक्ल के कदमों पर चलना चाहिए. उन्होंने आक्ट्राय खत्म किया टोल टैक्स खत्म कर दें.

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