नई दिल्ली. टेलीकॉम कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। ट्राई ने कॉल ड्रॉप के लिए मुआवजे को लेकर टेलीकॉम कंपनियों की मांगें ठुकरा दी है। अब टेलीकॉम कंपनियों को कॉल ड्रॉप होने पर ग्राहकों को मुआवजा देना ही होगा।

कॉल ड्रॉप मुआवजे पर ट्राई की टेलीकॉम कंपनियों की सीईओ के साथ बैठक खत्म हो गई है। कॉल ड्रॉप मुआवजे पर ट्राई की गाइडलाइंस में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ट्राई कॉल ड्रॉप ड्राइव टेस्ट की प्रकिया में बदलाव कर सकता है। ट्राई ने कॉल ड्रॉप के लिए मुआवजे देने की तैयारी करने का आदेश कंपनियों को दिया है ताकि 1 जनवरी से ये नियम लागू किया जा सके। ट्राई चेयरमैन ने साफ किया है कि कॉल ड्रॉप होने पर टेलीकॉम कंपनियों को 3 रुपये प्रति कॉल का हर्जाना देना होगा।

टेलीकॉम कंपनियों ने दलील दी थी कि कॉल ड्रॉप पर मुआवजा लेने से उनके ऊपर 2000 करोड़ रुपये से 50,000 करोड़ रुपये तक का सालाना बोझ आ सकता है और इसके चलते उन्हें टैरिफ में भी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। टेलीकॉम कंपनियों ने ये भी साफ किया है कि वो 2 हफ्ते तक ट्राई के जवाब का इंतजार करेंगी और देखेंगी कि ट्राई अपने रुख में बदलाव करता है या नहीं। अगर ऐसा नहीं होता है तो टेलीकॉम कंपनियां टैरिफ में बढ़ोतरी करेंगी या दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगी, इस पर फैसला कर सकती है।

इसके अलावा आज हुई बैठक में टेलीकॉम कंपनियों की टावर की कमी के कारण कॉल ड्रॉप होने की शिकायत पर कॉल ड्रॉप ड्राइव टेस्ट की प्रक्रिया में बदलाव करेगा। इसके तहत दिल्ली, मुंबई, इंदौर समेत 7 शहरों में कॉल ड्रॉप के लिए दोबारा ड्राइव टेस्ट करेगा और देखेगा कि वास्तविक स्थिति कैसी है।

इधर टेलीकॉम कंपनियों के संगठन सीओएआई के डीजी राजन मैथ्यूज ने कहा है कि उन्होंने ट्राई के जबाव का इंतजार है। उसके बाद ही वो आगे की रणनीति तय करेंगे। वहीं एयूएसपीआई के डीजी अशोक सूद का कहना है कि आज ट्राई के साथ बैठक में दो मुद्दो पर बातचीत हुई जिसके तहत कॉल ड्रॉप को रोकने की कोशिश पर चर्चा हुई है। 5 और शहरों में कॉल ड्रॉप का टेस्ट ड्राइव करने पर भी ट्राई राजी हो गया है।

ट्राई की सख्ती पर वीडियोकॉन के डायरेक्टर और सीईओ अरविंद बाली का कहना है कि कंपनियां कोशिश करेगी की ट्राई फैसले पर दोबारा विचार करें। कॉल ड्रॉप पर मुआवजा देने के फैसले से टेलीकॉम कंपनियों की दिक्कतें बढ़ेगी और कंपनियों की लागत पर भी असर पड़ेगा।

Related Posts: