सूरत. आपने पिछले साल में कई बार सुना होगा कि हीरा व्यापारियों ने अपने वर्करों को बोनस में कार, ज्यूलरी, जैसे गिफ्ट तक दे डाले थे और एक हीरा व्यापारी ने तो अपने भरोसेमेंद आर्टिशनों को फ्लैट तक दे डाले. इतनी शानो-शौकत वाले इस ग्लैमर बिजनस को शायद अब किसी की नजर लग गई है.
अब हीरा कारीगर बेरोजगारी से जूझ रह हैं और उनको कोई काम पर रखने को तैयार नहीं है, अगर सूत्रों की बातों पर यकीन किया जाए तो सुनने में आया है कि 50,000 से ज्यादा हीरा कारीगरों की कंपनियों से छुट्टी हो चुकी है जो बेरोजगारी से जूझ रहे हैं कारीगर कम और पुरानी तनख्वाह मे भी काम करने को तैयार हैं लेकिन कम्पनी उनको रखने को तैयार नहीं है. इसके पीछे कारण यह माना जा रहा है चीनी कंपनियों ने अपने आर्डरों से हाथ खेंच लिए हैं. डॉयमंड सिटी के नाम से मशहूर सूरत में यह हालात पहले कभी देखने को नहीं मिले. जून से संकट में आए स्टॉक मार्केट और धीमी वृद्धि ने चीन में बाजार को प्रभावित किया है. सूरत में एक कैरेट से भी कम के सस्ते हीरे की पॉलिश की जाती है, लेकिन चीनी उपभोक्ताओं में यह आभूषणों और सिंगल स्टोन के रूप में जाना जाता है.
बाजार मूल्य के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी डायमंड कंपनी डी बियर्स ग्रुप के डायमंड ब्रैंड फॉरएवरमार्क के सीईओ स्टीफन लुजयिऱ ने कहा, पिछले दो सालों में चीन जबर्दस्त वृद्धि के की राह पर था. अब चीन में पॉलिश किये हुए हीरे की मांग तेजी से घट रही है.

रत्न एवं आभूषण निर्यात प्रमोशन काउंसिल के चेयरमेन विपुल शाह ने इस वित्तीय वर्ष में करीब 50 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया. ऊंची वृद्धि और हीरे की ऊंची कीमतों के अनुमान के बीच सस्ते प्रवासी श्रम की उपलब्धता ने सूरत की कारीगरों की मांग कम कर दी है. पॉलिश किये हुए हीरे के भाव अपरिष्कृत हीरे की तुलना में तेजी से गिरे हैं. कटिंग और पॉलिश किये हुए हीरे का भारत का निर्यात जुलाई में एक साल पहले की तुलना में 18.3 फीसदी गिरा है. जुलाई में आयात 43 फीसदी गिर कर 1.9 बिलियन डॉलर रह गया. सालभर में आयात करीब 20 फीसदी तक गिर सकता है. प्रमुख हीरा निर्यातक किरण जेम्स के प्रबंध निदेशक मावजी पटेल का कहना है, जरूरत से ज्यादा आपूर्ति के समय में हमारे पास उत्पादन कम करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है. शहर में करीब आधा दर्जन बड़ी डायमंड कंपनियां बंद हो गई हैं, जो लाखों लोगों से जुड़े इस उद्योग के लिये बेहद महत्वपूर्ण है. इनमें से करीब दो तिहाई लोग सूरत से हैं. भारत सरकार के लिये रोजगार एक बड़ा संकट है. सरकार आर्थिक वृद्धि को उस दर तक ले जाने के लिये संघर्ष कर रही है, जो कार्यबल में हर साल जुड़ रहे लाखों लोगों को रोजगार दे सके.

 

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