नयी दिल्ली,  सूचना और प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने आज स्पष्ट किया कि विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) द्वारा अखबारों को विज्ञापन देने से संबंधित दिशा निर्देशों में संशोधन के कारण सूचीबद्ध अखबारों के पैनल या उनके नवीकरण में कमी नहीं आई है।

श्री नायडू ने राज्यसभा में पूरक प्रश्नों के जवाब में कहा कि मौजूदा वर्ष में समाचार पत्रों के डीएवीपी के पैनल में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है । अब तक 184 नये अखबार इससे जुडे हैं और अभी यह प्रक्रिया जारी है इसलिए पैनल के बढने की संभावना है और यह कहना गलत है कि संशोधित नीति के कारण पैनल में कमी आयी है। उन्होंने इन आशंकाओं को भी खारिज कर दिया कि नोटबंदी के कारण कुछ अखबार और उसके संस्करणों को बदं करना पडा है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का अखबारों पर असर होने की बात गलत है।

उन्होंने कहा कि जब इस नीति में संशोधन किया गया था तो नये दिशा निर्देशों में यह कहा गया था कि अखबारों को तीन समाचार एजेन्सियों यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया (यूएनआई), प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया और हिन्दुस्तान समाचार मे से किसी एक की समाचार सर्विस से जुडना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि बाद में नये दिशा निर्देशों में कहा गया कि पत्र सूचना कार्यालय से संबंद्ध अन्य समाचार एजेन्सियों की समाचार सेवा लेने वाले अखबार भी पैनल में शामिल किये जा सकते हैं।

जनता दल यू के हरिवंश ने पूछा कि क्या हिन्दुस्तान समाचार , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुडी है। इस पर श्री नायडू ने कहा,“ यह बहुत पुरानी है और हिन्दुस्तान की है। सरकार यह नहीं देखती कि यह आरएसएस की है या कांग्रेस की। ” उन्होंने कहा कि वैसे भी वह किसी राष्ट्रवादी संगठन की तुलना राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं करते।

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