भारत सरकार की टेलीफोन रेग्यूलेटरी आथेरिटी आफ इंडिया (ट्राई) ने अपने निर्णय पर दृढ़ रहते हुए टेलीफोन कम्पनियों पर ड्राप काल होने पर एक फोन पर एक रुपया जुर्माना आगामी वर्ष 1 जनवरी 2016 से लगा दिया है. टेलीफोन कम्पनियों के आग्रह पर ट्राई ने इसकी पुन: समीक्षा (रिव्यू) करना मान लिया है और यह भी स्पष्टï कर दिया है कि यह पुन: निर्णय पर स्थगन आदेश (स्टे आर्डर) नहीं माना जायेगा. लेकिन ट्राई इस पर अगले दो हफ्तों में विचार करने जा रही है और निर्णय लागू होने में अभी भी दो महीनों- नवम्बर व दिसम्बर का समय है इसलिये भी स्थगन का कोई अर्थ ही नहीं रहता. लेकिन आगामी दो महीनों में टेलीफोन कम्पनियों व टेलीफोन उपभोक्ताओं दोनों के हितों में सामंजस्य बनाते हुए ट्राई को निर्णय करना चाहिए.

ट्राई का जुर्माना (पेनाल्टी) लगाना कुछ जरूरत से ज्यादा निर्णय प्रतीत होता है. जुर्माना उस समय लगाया जाता है जब कोई कानून का उल्लंघन हो. काल ड्राप एक तकनीकी समस्या है. यह सभी के लिये टेलीफोन कम्पनियों, टेलीफोन उपभोक्ता व सरकार के लिये हानिकारक व असुविधाजनक है. लेकिन टेलीफोन कम्पनियां इसे जान-बूझकर उनकी कमाई बढ़ाने के लिये नहीं कर रही हैं. तब भी टेलीफोन कम्पनियों पर उपभोक्ता को उचित सेवा देने का दायित्व तो बनता ही है.

उनका यह दायित्व है कि उपभोक्ता को त्रुटिहीन अपडेट तकनीक की सेवा प्रदान करे. उन्हें यह पता लगाकर उपभोक्ता व सरकार को जानकारी देना चाहिए कि संचार तकनीकी में अति आधुनिक देश जापान व दक्षिण कोरिया और विकसित देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रान्स, जर्मनी, रूस आदि में भी काल ड्राप की समस्या है या नहीं. यदि इन देशों में काल ड्राप नहीं होता है तो भारत में भी वही तकनीकी लायी जानी चाहिए, जिससे यह त्रुटि न होने पाये. तकनीक का अर्थ ही यह होता है कि फौरन अपडेट होते हुये ही चलती है- पुरानी तकनीक नयी तकनीक के सामने स्वयं समाप्त हो जाती है. यदि हम पुरानी तकनीक पर ही चल रहे हैं तो उसे ‘कबाड़ा’ ही कहा जाएगा.

टेलीफोन कंपनियों का कहना है कि एक रुपया प्रति ड्रॉप काल की पेनाल्टी से उन पर प्रतिदिन 150 करोड़ रुपया का बोझ आयेगा. इनकी भरपाई के लिए वे फोन के रेट बढ़ाएंगे. इससे तो यह होगा पेनाल्टी टेलीफोन कम्पनियों पर लगेगी लेकिन वे उसे उपभोक्ता से वसूल करेंगे.

सेल टैक्स में ऐसा हो चुका है. कहने को तो वह सेल (विक्रेता) पर लगाया था, लेकिन उसने खरीददार से वसूल कर सेल टैक्स को परचेज टैक्स बना दिया था. यह काम भी खुले तौर पर हुआ था- वह रसीद में सेल टैक्स लिखकर वसूलता था और सरकार ने उसे चलने भी दिया. अब ड्राप कॉल पेनाल्टी में भी वही होता दिखाई दे रहा है. इसके लिये टेलीफोन उपभोक्ताओं की उपभोक्ता अदालतों में ऐसी अवैध वसूली को चुनौती देनी होगी.

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