NSGसोल/नई दिल्ली,  चीन और कुछ देशों के अडिय़ल रवैये के कारण तमाम कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद भारत को एनएसजी में जगह नहीं मिल पाई, लेकिन उम्मीद खत्म नहीं हुई है. समूह की अगली बैठक में इस मसले पर फिर चर्चा होगी.

सोल से मिली नाउम्मीदी के तुरंत बाद कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एनएसजी में भारत को शामिल कराने के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उतावलेपन के कारण आज पूरी दुनिया में भारत का तमाशा बन गया है. दूसरी ओर भाजपा इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रही और उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.

दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में एनएसजी की दो दिवसीय पूर्ण बैठक आज भारत की सदस्यता के मुद्दे पर बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने चीन का नाम लिए बगैर कहा कि एक देश विशेष की ओर से लगातार विरोध के कारण भारत को 48 देशों के इस समूह में इस बार भी जगह नहीं मिल पाई. खबर है कि चीन के अलावा कुछ अन्य देशों ने भी भारत की सदस्यता का विरोध किया. भारत ने एनएसजी में प्रवेश की पुरजोर कोशिश की. प्रधानमंत्री मोदी ने उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक में भारत के पक्ष में चीन को राजी करने की कोशिश भी की, लेकिन सोल में चीन के मुख्य वार्ताकार भारत विरोधी अपने रुख पर कायम रहे. समूह में भारत की सदस्यता की दावेदारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए विदेश सचिव एस जयशंकर सोल पहुंचे थे, लेकिन उनके प्रयासों का भी कोई नतीजा नहीं निकल सका.

बैठक के बाद स्वरूप ने ताशकंद में जारी बयान में कहा कि बैठक में शामिल कई देशों ने भारत की सदस्यता का खुलकर समर्थन किया. हालांकि एक देश इसमें भारत के विरोधी खेमे का यह कहते हुए नेतृत्व कर रहा था कि चूंकि भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं इसलिए उसे एनएसजी की सदस्यता नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ प्रक्रियात्मक बाधाओं का मुद्दा जोर-शोर से उठाए जाने के बावजूद बैठक में लगातार तीन घंटे तक इस बात पर चर्चा होती रही कि भविष्य में उसकी सदस्यता पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि एनएसजी के विस्तार की जो मांग भारत की ओर से की जाती रही है, वह तर्कहीन नहीं है.