नयी दिल्ली,  सरकार ने आज कहा कि देश के तटीय रेखा बहुत लम्बी है, इसकी पुख्ता सुरक्षा बड़ी चुनौती है और इसे केवल एक एजेंसी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने आज लोकसभा में बताया कि देश की तटीय रेखा 7516.6 किलोमीटर लंबी है ।

इसकी पुख्ता सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। तटीय सीमा की सुरक्षा का काम एक ही एजेंसी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। तटीय रेखा की तीन स्तरीय सुरक्षा प्रणाली है । इसमें राज्य की पुलिस, भारतीय तट रक्षक और नौसेना का योगदान रहता है। श्री रिजिजू ने कहा कि राज्य या केन्द्र शासित पुलिस के जिम्मे जल क्षेत्रों की बारा नाॅटिकल मील की सुरक्षा रहती है। भारतीय तट रक्षक और नौसेना इस बारा नॉटिकल मील समेत 200 नॉटकिल मील तक समूचे समुद्री क्षेत्रों पर सुरक्षा का काम देखती है।

उन्होंने पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि 2008 के मुंबई हमले के बाद तटीय सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कई कदम उठाये गये जिससे कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके । तटीय सुरक्षा में मछुआरे भी आंतरिक हिस्सा रहते है और यह “ ऑख और कान की तरह काम करते है।”

गृह राज्यमंत्री ने बताया कि तटीय राज्यों में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध हैं और इन्हें अधिक मजबूत करने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। तटीय राज्यों की पुलिस की सुरक्षा संबंधी अवसंरचना सुदृढ़ करने के लिए गृह मंत्रालय व्यापक एवं एकीकृत तटीय सुरक्षा योजना (सीएसएस) कार्यान्वित कर रहा है।

योजना के अंतर्गत तटीय राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने 183 तटीय पुलिस थानों को प्रचालनात्मक बनाया है। यह थाने 23 पोतों, 97 जांच चौकियों, 58 आउट पोस्टों, 30 बैरकों, 204 नौकाओं, 280 चार पहिया वाहनों और 546 दो पहिया वाहनों से लैस हैं। समुद्री मार्ग में खतरों के खिलाफ राष्ट्रीय समुद्री एवं सुरक्षा समिति (एनसीएसएमसीएस) द्वारा सभी पक्षों के साथ समय-समय पर तटीय सुरक्षा की समीक्षा की जाती है।

Related Posts: