देश में दालों व खाद्य तेलों का भारी अभाव एक लम्बे अर्से से चला आ रहा है. इस अभाव में खाद्य तेल सबसे आगे है जिसका 60 प्रतिशत भाग देश को आयात करना पड़ रहा है. जब भी किसी प्राकृतिक कारणों से देश में कृषि उपजों में ऊंच-नीच हो जाती है तो इनका आयात भी और बढ़ जाता है. इस साल बेमौसम बरसात से यही स्थिति पैदा हो गई है. पहले दालों का आयात 40 प्रतिशत था वह इस साल बढ़कर 60 प्रतिशत के रिकार्ड पर पहुंच गया.

खाद्य तेलों में अभाव की स्थिति 60 प्रतिशत से बढ़कर 70-80 प्रतिशत तक जा रही है. देश में दालों व खाद्य तेलों के भाव दिन दूने होते जा रहे हैं. तुअर दाल जो 60 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रही थी, वह 110 रुपये किलो के ऊपर चली गयी. खाद्य तेल जो 90 रुपये के परिधि में थे वे भी 110 के ऊपर चले गये हैं. खाद्य वस्तुओं की महंगाई से महंगाई दर बढ़कर 5.01 प्रतिशत हो गयी है. सरसों तेल 91 रुपये लीटर से 105 रुपये और मूंगफली तेल में भारी तेजी आ गई है. यह 118 रुपये प्रति लीटर से 132 रुपये लीटर हो गया. खाद्य तेलों में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हो चुकी है और भाव बढऩे की प्रक्रिया जारी है. मई में वनस्पति तेल आयात 13.71 लाख टन के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया. पिछले साल इसी अवधि में यह आयात 10.30 लाख टन था. घरेलू बाजार में सोयाबीन के दाम बढऩे और मूंगफली तेल का कम उत्पादन हुआ है. इस कारण सोया व सनफ्लावर तेल के आयात में भारी
वृद्धि हुई है.

हमारा पूरा सार्वजनिक वितरण प्रणाली सिस्टम मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात होने वाले पाम आइल पर निर्भर है. इसका भी रिकार्ड आयात पिछले माह मई में 2.75 लाख टन का रहा, जो अब तक का सबसे अधिक है. दोनों निर्यातक मलेशिया व इंडोनेशिया भारत की इस स्थिति का पूरा लाभ उनका निर्यात और हमारा आयात बढ़ाकर करना चाहते है. दोनों देशों ने पाम आइल पर से निर्यात शुल्क की व्यवस्था खत्म कर दी जिससे उनका निर्यात बढ़ गया और भारत के लिये सस्ता भी हो गया. लेकिन पिछले महीने डालर के मुकाबले रुपए की दर 7.5 प्रतिशत घट गयी. इससे खाद्य तेलों में अंतरराष्टï्रीय स्तर पर भाव में गिरावट का पूरा फायदा भारत को नहीं हो पाया.

पिछले 11 महीनों में खाद्य तेलों का कुल आयात 26 प्रतिशत से बढ़कर 78.33 लाख टन हो गया. देश में हर महीने 16 लाख टन खाद्य तेल की खपत है और इस समय देश के पास 43 दिन की जरूरत का स्टाक मौजूद है और आयात होता जा रहा है.

हमारी राशन व्यवस्था पूरी तरह पाम आइल पर निर्भर है. यह खाद्य तेलों का बहुत बड़ा भाग है. इंडोनेशिया व मलेशिया में समुद्र तटों के नजदीक इसकी बम्पर खेती होती है. भारत में तीन तरफ समुद्र है. यदि हम क्रेश प्रोग्राम से भारतीय समुद्र तटों पर पाम की खेती करे तो भारत खाद्य तेलों के सतत् बने हुए अभाव से मुक्त होकर इनमें भी सरप्लस और आत्मनिर्भर हो सकता है.

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