उत्तर पूर्व के तीन राज्यों की विधानसभाओं के आम चुनाव में त्रिपुरा में गत 25 वर्ष से सत्तारुढ़ माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की मुख्यमंत्री श्री मानक सरकार को हराकर पहली बार भारतीय जनता पार्टी वहां अपने स्वयं के बहुमत से सत्ता में आयी.

उसे 60 सदस्यीय विधानसभा (चुनाव 59 सीटों पर हुआ) में 35 और उसके सहयोगी पीपुल्स फ्रन्ट आफ त्रिपुरा को 8 सीटें मिलीं और दोनों ने मिलकर 43 का बहुमत बना लिया. त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी ने न सिर्फ चुनाव जीता है बल्कि अपनी राजनैतिक व संगठनात्मक क्षमता का जबरदस्त प्रदर्शन किया है.

त्रिपुरा के गत 2013 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 50 उम्मीदवार खड़े किये थे जिनमें से 49…. की जमानत जब्त हो गयी और एक हार कर सिर्फ अपनी जमानत बचा पाया था और पार्टी को राज्य में 1.5 प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार 2018 में उसने बहुमत हासिल किया और इसका वोट प्रतिशत भी भारी बढक़र 43 प्रतिशत हो गया.

ऐसा ही राजनैतिक करिश्मा सन् 1977 में आपातकाल के समय लोकसभा के चुनाव घोषित होते ही श्री जयप्रकाश नारायण ने आनन-फानन में सभी विपक्षी दलों को एक करके जनता पार्टी बनायी और प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व की कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंका.

लेकिन इसके बाद श्रीमती गांधी ने ऐसा ही पलटवार कर राजनैतिक करिश्मा किया कि सिर्फ तीन में 1980 में अपने राजनैतिक चातुर्य व सामथ्र्य सेे पहले चौधरी चरण सिंह को जनता पार्टी में ‘विभीषण’ बनाकर जनता पार्टी को छिन्न-भिन्न कर दिया और 1980 में आ गये लोकसभा के मध्यावधि चुनाव में जनता पार्टी की सरकारों को भी केन्द्र व राज्यों में उसी तरह सत्ता से उखाड़ फेंका और पार्टी पुन: केंद्र व राज्यों में सत्ता में और ज्यादा ताकत से स्थापित हो गई.

कुछ वर्षों पूर्व ही कांग्रेस पंजाब में सत्ता में अकाली-भाजपा की सरकार को उखाड़ कर पुन: सत्ता में आयी. गुजरात में अपनी सीटें बढ़ाईं. राजस्थान व मध्यप्रदेश के उपचुनावों में जीती. कांग्रेस को कभी भी ‘राइट ऑफ’ नहीं कहा जा सकता.

इस परिप्रेक्ष्य में कर्नाटक में हो रहे विधानसभा के आम चुनाव पर सबकी नजर गहरी हो गई है कि वहां क्या होता है. इस समय वहां कांग्रेेस सत्ता में है और श्री सिद्धारमैया मुख्यमंत्री हैं. 60 सदस्यीय नागालैंड विधानसभा में भाजपा को 29 सीटें मिली हैं और सत्तारूढ़ पार्टी एन.पी.एफ. को 27 सीटें मिली. यहां भारतीय जनता पार्टी बहुत सहूलियत से साझा सरकार बनाने जा रही है.

कांग्रेस के लिए यह निश्चित ही चिंता का विषय रहेगा कि त्रिपुरा व नागालैंड में उसे एक भी सीट नहीं मिली- वह ‘जीरो’ हो गई. जबकि सन् 2013 के चुनावों में कांग्रेस के त्रिपुरा विधानसभा में 10 और नागालैंड में 8 विधायक थे.

मेघालय में कांग्रेस 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. पिछली विधानसभा में इसकी सरकार थी और इसके 29 सदस्य थे जो अब घटकर 21 रह गए हैं, लेकिन उसने मेघालय में पुन: सरकार बनाने का दावा ठोक दिया है. उससे ऐसा आभास हो गया कि इससे अन्य दलों से मिलकर साझा बनाने जा रही है. लेकिन यह भी दलगत स्थिति बहुत नाजुक है और यहां सरकार सदा राजनैतिक संकट में रहेगी.

यहां भारतीय जनता पार्टी काफी कमजोर रही. पर उसे यह संतोष हो सकता है कि गत विधानसभा में वह ‘जीरो’ थी और अब उसके दो सदस्य है.इस साल के अंत तक देश में निर्णायक चुनाव मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में नवंबर-दिसंबर में होगा और उसके थोड़े अंतराल से 2019 के प्रारंभ में लोकसभा के आम चुनाव होंगे.

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