एक लंबे अर्से के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के थोक मूल्यों में मूल्यों-मुद्रास्फीति में कमी आयी है. इसे रिटेल तक आने में कुछ समय लगेगा लेकिन बाजार सुधार की एक सार्थक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. थोक मूल्यों में कमी…. जनवरी 2015 में शून्य से घटकर 0.39 प्रतिशत आ गयी है जो दिसंबर 2014 में 0.11 प्रतिशत तक थी. हालांकि अभी फरवरी में फिर से पेट्रो क्रूड के भावों में रिकार्ड गिराकर के बाद तेजी आना शुरू हो गयी है. भारत के थोक मूल्यों में कमी इससे पहले डीजल-पेट्रोल के मूल्यों में गिरावट से व्यापार जगत में ढुलाई खर्चें में जो कमी आयी थी उसका प्रभाव भी थोक मूल्यों पर पड़ा है.

इसके विपरित जनवरी में ही रिटेल मूल्य 5 से बढ़कर 8 प्रतिशत हो गये थे. सब्जियों के भावों में उछाल आया था. तमाम अन्य सब्जियों के मूल्य पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है कि बाजार में थोक और रिटेल में आलू-टमाटर के क्या भाव हो. इनके भाव बढऩे या घटने से ही अन्य सब्जियों के भाव खुद ही बढ़-घट जाते है. आलू होटल-ढाबों की ग्राहकी की जान है. वहीं ये दोनों सब्जियां घर की रसोई में भी अनिवार्य होने की हैसियत रखती है. हाल ही में आलू के भाव चढ़े थे तो केंद्र सरकार ने आलू के निर्यात पर रोक लगा दी. इसका असर यह हुआ कि आलू का भाव एकदम से 600 से 400 रुपये प्रति क्विंटल हो गयी और अन्य सब्जियों के भाव भी नीचे आ गये. इस समय औद्योगिक मेन्यूफेक्चरिंग में थोक मूल्यों में एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है.

थोक मूल्यों में महंगाई के आंकड़ों से बाजार की दिशा तय होगी. बैंकिंग क्षेत्रों को यह संभावनायें दिख रही हैं कि रिजर्व बैंक अपनी अगली तिमाही की मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है और यह कटौती 75 आधार अंकों 0.75 प्रतिशत की हो सकती है. कुछ आर्थिक आधार इस तरह से बन रहे हैं कि भारत की महंगाई दर आगामी वर्ष की जनवरी 2016 में घटकर 6 प्रतिशत आ जायेगी. फौरी तौर पर आगामी एक दो महीनों में ही महंगाई दर आधा प्रतिशत की कमी दर्ज होने की संभावना है.

देश की आर्थिक गणना के लिये अब वर्ष 2012 को आधार वर्ष माना जा चुका है और इस आधार की गणना से देश में मुद्रास्फीति का दबाव कम हुआ है.
भारत की अंतरराष्टï्रीय स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा. इस समय यूरो जोन में फिर एक बार ग्रीक का वित्तीय संकट गहरा गया है और यूरो देश उसे उबारने में फिर लग गये हैं. यूरोप के गेहूँ बाजार को निर्धारित करने वाला देश यूक्रेन भी रूस के साथ सीमा क्षेत्रों में युद्ध की स्थिति में चल रहा है और दोनों के बीच युद्ध विराम के अथक व गहन प्रयास किये जा रहे हैं. भारत में शीघ्र ही रबी की मुख्य फसल गेहूं जो बम्पर हो चुकी है बाजार में आने वाली है. इस वक्त सरकार व व्यापारियों के पुराना स्टाक निकालना है. लेकिन इस समय यूरो जोन में गेहूं के भाव नीचे चल रहे हैं और हमारा निर्यात फायदे का नहीं है.

इन दिनों भारत के निर्यात व्यापार में 12 प्रतिशत की कमी आयी है. निर्यातक संघ से सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. देश के स्टील उद्योग भी चीन से सस्ता स्टील आयात में … हो गया है. उसे लागत से 7-8 प्रतिशत कम पर स्टील बचना पड़ रहा है. स्टील उद्योग चाहता है कि चीन से स्टील आयात पर आयात ड्यूटी बढ़ाई जाए.

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