bpl2भोपाल,   प्रदेश के इतिहास में सेवा में रहते हुए दो आईएएस अधिकारी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे है. उन्होंने अपने आपको दलित समाज का होने का बताते हुए कहा कि इसी के कारण उनके साथ भेदभाव बरता जा रहा है.

उन्होंने कहा कि वे और उनके साथ धरने पर बैठे दलित समाज के लोग ऐसा रवैया नहीं चलने देंगे. अगर यही चलता रहा तो देखना जल्द ही बाबा साहेब आंबेडकर का कोई अनुयायी प्रदेश का मुख्यमंत्री बन जाएगा.

तुलसी नगर स्थित आंबेडकर मैदान में बाल संरक्षण आयोग के सचिव रमेश थेटे और निलंबित आईएएस अधिकारी शशि कर्णावत दलित-आदिवासी फोरम के बैनर तले धरने पर बैठे. धरनास्थल पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा भी पहुंचे. फोरम के संयोजक डॉ. मोहनलाल पाटिल इस धरने के आयोजक हैं.

तो काट दूंगा उनका गला
इस फोरम के संयोजक मोहनलाल पाटिल ने कहा कि जो भी दलितों को परेशान करेगा, उनके साथ अन्याय करेगा तो उसका गला काट देंगे. बाद में जब मीडिया ने उनसे पूछा कि आपने जो कहा वो क्या सही है? तो पाटिल बोले कि मैं अपनी बात पर कायम हूं.

बुजुर्ग को आया अटैक
धरने के दौरान ही एक आदिवासी बुजुर्ग को धरना स्थल पर हार्ट अटैक आ गया. जैसे ही ये सूचना लोगों में फैली धरना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई. मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस वाहन से आदिवासी को 1250 अस्पताल में भर्ती कराया है.

दे चुके हैं जानकारी

रमेश थेटे ने दावा किया कि वह मप्र के मुख्य सचिव एंटोनी डीसा को चि_ी लिखकर सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने की जानकारी दे चुके हैं. थेटे ने लिखा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकायुक्त पीपी नावलेकर के दबाव में आकर मेरे खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी है.

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