नई दिल्ली व्यापारियों के बीच सीमित प्रतिस्पर्धा को समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय साझा बाजार बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। सरकार ने 10 राज्यों में 50 नियमित थोक मंडियों की पहचान के लिए प्रस्ताव पेश किया है। वहीं राज्य सरकारों की भागीदारी के साथ मंडियों के कामकाज में सुधार किया जा रहा है।

राष्ट्रीय साझा बाजार पर आए विचार पत्र के मुताबिक राज्य सरकारों को आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाना होगा जिसमें पूरे क्षेत्र के लिए एकल व्यापारिक लाइसेंस, मंडी कर, चुनिंदा मंडियों में कीमतों के लिए होने वाली नीलामी शामिल है।

इस कार्यक्रम के लिए करीब 200 करोड़ की रािश आवंटित की गई है जिसे वर्ष 2015-16 से अगले तीन वर्ष तक निवेश करना है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से देश की सभी 585 मंडियों को इस कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा। लघु किसान कृषि व्यवसाय संगठन, योजना को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा। इसके तहत हर एक मंडी को 30 लाख रुपये दिए जाएंगे ताकि इलेक्ट्रॅानिक नीलामी के लिए आवश्यक हार्डवेयर को लागू किया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक कृषि उत्पादों के लिए राष्ट्रीय साझा बाजार से पूरे देश में एक समान और कीमत संबंधी मुद्दों पर एक पारदर्शी प्रक्रिया बनाने में मदद मिलेगी। इससे कीमतों में गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी साथ ही बाजार लेवी(एक तरह का उपकर) भी नीचे लाया जा सकेगा। वर्तमान में मंडी कर की दर 0.5 फीसदी से लेकर 10-15 फीसदी तक है। यह हर राज्यों में भिन्न है। पंजाब में अनाज पर 14 फीसदी है तो वहीं मप्र में लेवी की दर 5 फीसदी से भी कम है। राज्यों की थोक मंडियां संबंधित राज्य की कृषि उत्पाद विपणन समिति कानूनों से संचालित होती हैं। एपीएमसी कई तरह के शुल्क लेती है जिसमें खरीदारों पर बाजार शुल्क, कमीशन एजेंट से लाइसेंसिंग शुल्क आदि आता है। कमीशन एजेंट द्वारा खरीदारों और किसानों के बीच होने वाले लेन-देन पर शुल्क लगाया जाता है।
पहले केंद्र सरकार ने मॉडल एपीएमसी कानून बनाया था लेकिन कुछ ही राज्यों ने उसे पूरी तरह अपनाया था। तमाम अवसरों पर एक साझा राष्ट्रीय बाजार के अभाव को कीमतों के भारी अंतर के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।इसमें कहा गया था कि कृषि उत्पादों के लिए एकीकृत बाजार का अभाव और तमाम विकृतियों से ग्रस्त बाजार, देश में कृषि विकास की एक बड़ी समस्या है। यह भी कहा गया था कि राज्यों को विनियमित वस्तुओं की एपीएमसी अनुसूची से फल और सब्जियों को छोड़ देना चाहिए ।

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