केन्द्र सरकार के तमाम दावों के विपरीत देश में दालों के भावों में हर रोज नयी तेजी आती जा रही है. इसी क्रम में तुअर और उड़द के भावों में अब तक 37 प्रतिशत वृद्धि आ चुकी है और क्रम लगातार जारी है. केन्द्रीय खाद्य मंत्री श्री रामविलास पासवान अपने बयान में ऊटपटांग ही ज्यादा लग रहे हैं. कह रहे हैं सब ठीक है और ठीक हो जाएगा, लेकिन भावों के मामले में कुछ भी ठीक नहीं है.

गेहूं के भाव भी तेजी से बढ़कर 30-35 रुपये किलो तक जा रहे हैं. लगातार दो साल से देश में कई जगहों पर सूखे की स्थिति चल रही है, उत्पादनों में गिरावट हो रही है, लेकिन इन्तजाम कम और इन्तजार के बयान ज्यादा हो रहे हैं. श्री पासवान इस बात से संतुष्टï दिख रहे हैं कि पिछले साल तुअर, उड़द 200 रुपये किलो तक बिकी पर इस साल कम 177 किलो पर चल रही हैं. पर जिस तरह से भाव बढ़ते जा रहे हैं उससे तो यह लग रहा है कि इस साल भाव 200 रुपये किलो से भी ऊपर होने जा रहे हैं.

श्री पासवान एक तरफ यह कहते हैं राज्य सरकारें जमाखोरी के खिलाफ कार्यवाही करे और यह भी कह रहे हैं कि राज्य यह बताये कि उन्हें कितनी दाल चाहिए. सरकार के पास 50,000 टन का बफर स्टाक है जो जारी कर दिया जायेगा.

सरकार ने 25,000 टन दालों का अतिरिक्त आयात आर्डर दे दिया है. निजी व्यापारियों ने भी 55 लाख टन दालें आयात कर ली हैं. इस साल देश में दालों का उत्पादन 173.3 लाख टन रहने का अनुमान है, लेकिन दाल व्यापारियों का अनुमान है कि इस वर्ष दालों का उत्पादन काफी कम रहेगा. श्री पासवान का कहना है कि दालों की कमी के लिये जमाखोर जिम्मेदार हैं. लेकिन लोग यह जानना चाहते हैं कि सरकार… इस मामले में कितनी जिम्मेदार है और क्या करने जा रही है.

सूखे की स्थिति को देखते हुए शक्कर का उत्पादन भी 10 प्रतिशत कम रहेगा और इसके भावों में तेजी आ चुकी है. देश में अनेक जगहों पर मानसून की वर्षा 14 प्रतिशत कम रही है. देश के 640 जिलों में से 250 जिलों में सूखे की स्थिति है. देश में सूखे की स्थिति 40 प्रतिशत भू-भाग पर है. दालों के उत्पादन और खपत में 27 मिली टन की कमी है, जो आयात से पूरी की जा रही है.

भारत दुनिया में ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा शक्कर उत्पादक देश है. इस बार सूखे के कारण 2 लाख टन की कमी आ सकती है. यू.पी.ए. शासन काल में भावों की तेजी आयी थी, लेकिन इस समय जो तेजी आयी है वह पिछली सरकार के समय के भावों से कहीं बहुत ज्यादा है. इस समय आयात रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने गेहूं, शक्कर पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है. सूखे के कारण जो स्थिति बिगड़ती जा रही है उससे तो आयात पर ड्यूटी होना ही नहीं चाहिए.

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