भारत में लगभग पिछले 20 वर्षों से दालों का अभाव बना हुआ है. यही हाल खाद्य तेलों का है. दालों में हम अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत पैदा करते है और 40 प्रतिशत दालों का आयात साल दर साल आयात किया जाता है. इस बार बेमौसम बरसात से लगभग सभी फसलें बिगड़ गयी है. उनमें दालों की फसलें भी शामिल है. अंतर इतना जरूर बढ़ गया है. इस बार अब दालों का अभाव 20 प्रतिशत और बढ़कर 40 से 60 प्रतिशत हो गया और उस वजह से अब आयात भी 40 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत का हो गया है.

भारत आमतौर पर म्यांमार, आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड से दालों का आयात करता है. भारत की भोजन प्रणाली में खाने में सब्जी और दाल भोजन का नियमित अंग होती है. इसका सामाजिक स्वरूप भी इसी वजह से निर्धारित किया गया होगा कि दालों से ही सबसे ज्यादा सबसे महत्वपूर्ण तत्व प्रोटीन शरीर को मिलता है.
अभी दालों के भावों में 60 से 70 प्रतिशत का उछाल आ गया है. इसका कारण असाधारण अभाव नहीं है बल्कि यह व्यापारिक धारणा है कि दालों की कमी बढ़ती ही जा रही है और वही मूल्य बढऩे का आधार है. सरकार ने इस मानसिकता को रोकने के लिये फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया को आदेश दिया है कि वह दालों का आयात करे और गेहूं व चावल की तरह दालों का भी बफर स्टाक बनाए.
दालों की कीमतों में एक साल में 64 प्रतिशत का उछाल आ चुका है और तेजी जारी है. बेमौसम बरसात की वजह से वर्ष 14-15 में दाल उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी से स्टाक 20 लाख टन घट गया है और इस समय यह 1.73 करोड़ टन रह गया है. आयातित दालों के आते ही देश में दालों के भाव गिरने लगेंगे.

भारत में कई तरह की दालों का चलन है. पंजाब में उड़द दाल ज्यादा खायी जाती है. अधिकांश भारत में तुअर मुख्य दाल है. मुस्लिम समाज में मसूर चलती है. खाने के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों में मूंग और उड़द का ही प्रयोग होता है. भारत की दाल विविधता के आधार पर भी आयात को नियमित करना पड़ता है. गेहूँ, चावल व दालों के भावों में भोजन का संतुलन और खर्च का सामंजस्य बनता है. अभी तक दालों का आयात निजी व्यापार के जरिये होता है लेकिन इस बार भी सरकार स्वयं एफ.सी.आई. के माध्यम से आयात करने जा रही है. एफ.सी.आई. को यह भी कहा गया है कि आगे से वह सीधा किसानों से भी दालें खरीदे और देश में अब आगे से दालों का भी बफर स्टाक रहेगा.

दालों का उत्पादन बढ़ाने में सरकार के साथ किसान भी आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. दलहनों का खेती रकबा बढ़ा है और मध्यप्रदेश इस मामले में सबसे आगे चल रहा है. राज्य का प्रयास यह है कि दालों का इतना अभाव व इतनी ज्यादा खपत व ऊंचे भाव हैं कि यहां का किसान दलहनों के उत्पादन में अपनी आर्थिक उन्नति देख रहा है.

देश में खाद्य तेलों में भी सर्वाधिक 60 प्रतिशत की कमी चल रही है और इतना ही खाद्य तेल हर साल आयात होता है. एफ.सी.आई. खाद्य तेलों का भी आयात करने लगे और इनका भी बफर स्टाक बनाया जाए.

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