नर्मदा नदी की परिक्रमा एक धार्मिक परिपाटी हमेशा से चली आ रही है और लोग इसे करते भी आ रहे हैं.लेकिन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नमामि देवी नर्मदे से इसे उत्कृष्टï कोटि का नदी अभियान
बना दिया. गंगा एक्शन प्लान केवल सफाई अभियान है लेकिन श्री चौहान ने इसे पर्यावरण, स्वच्छता और सभी प्रकार का अभियान बना दिया. यहां हरी चुनरी के रूप में फलों का जंगल लगाया जा रहा है.

इसके कुछ समय बाद राज्य के भूतपूर्व कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री श्री दिग्विजयसिंह भी 6 महीने की नर्मदा परिक्रमा पर निकल पड़े. इसका प्रारंभ बरमान घाट से शुरू हुआ था और 9 अप्रैल को बरमान घाट पर ही उसका समापन भी हो गया.

उन्होंने प्रारंभ में ही घोषणा की थी कि यह उनकी निजी आध्यात्मिक यात्रा रहेगी और उसका कोई राजनैतिक रूप नहीं है. इनमें उनकी पत्नी श्रीमती अमृता राव भी शामिल थी. समापन के साथ ही अपने पहले राजनैतिक बयान में कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाना लक्ष्य है. उनका मुख्यमंत्री बनने का कोई इरादा नहीं है. यदि पार्टी हाईकमान ने चाहा तो वे चुनाव में पार्टी की अगुवायी करेंगे.

इन दो बड़ी यात्राओं के बाद भी आज तक नर्मदा नदी का इसके साथ-साथ अन्य नदियों से भी रेत का अवैध बहुत बड़ा माफिया धंधा बना हुआ है. नर्मदा की बीच धारा में से रास्ते तक बनाये है. नर्मदा से रेत निकालने पर प्रतिबंध है लेकिन रेत बराबर निकाली जा रही है. परिक्रमाएं काफी नहीं है. नर्मदा की रक्षा करना सबसे जरूरी हो गया है. उसमें पानी की काफी कमी हो गयी है.