महिदपुर

कु. अमिता चौरडिय़ा द्वारा भगवती दीक्षा अंगीकार करने के पावन उपलक्ष्य में नाहर परिवार के निवास से प्रात: विशाल शोभायात्रा निकाली गई। सुसज्जित बग्घी में दीक्षार्थी ने विराजित होकर सबका अभिवादन किया।

जुलूस प्रवेश मार्ग पर जगह-जगह समाजजनों ने दीक्षार्थी का भावभीना स्वागत किया। विशाल जनमैदनी शोभायात्रा में सम्मिलित होकर चल रही थी। बेण्ड की सुमधुर स्वर लहरियों पर दीक्षार्थी की जय-जयकार के नारे गुंजायमान हो रहे थ। नगर भ्रमण के पश्चात यह शोभायात्रा भव्य धर्मसभा में परिवर्तित हुई।

धर्मसभा में प.पू. गुरुवर्या शीलरेखाश्रीजी म.सा. की सुशिष्या सुवर्षाश्रीजी म.सा. ने दीक्षार्थी अमिता चौरडिय़ा के नाहर परिवार द्वारा आयोजित खरतरगच्छ आराधना भवन में बहुमान समारोह में अभिव्यक्त करते हुए कहा कि हम सभी जैन महावीर स्वामीजी के झण्डे तले बैठे है।

संयम बिना मुक्ति नहीं, संयम बिना कल्याण नहीं। भगवान की प्रथम देशना सफल नहीं हुई किन्तु पावापुरी में चतुर्विद संघ की स्थापना कर देशना सफल हुई। अमिता ने भौतिक, सांसारिक समस्त साधनों, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद संसार की असारता को जान दीक्षा का यह दृढ़ संकल्प लिया।

इसकी अनुमोदना में हमें भी कुछ संकल्प लेकर अपना जीवन सार्थक करना चाहिये। गुरुवंदना एवं मंगलाचरण से धर्मसभा की शुरुआत हुई। सीमा समदडिय़ा (जावरा) एवं जिनदत्तसूरी महिला मण्डल की आशा चौपड़ा, चन्दना चौपड़ा, अनिता चौपड़ा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

खरतरगच्छ श्री संघ अध्यक्ष सरदारमल चौपड़ा ने स्वागत भाषण में दीक्षार्थी को मंगल कामनाऐं दी। हेमप्रभा बहु मण्डल की पिंकी एवं सीमा चौपड़ा, संगीता मोदी, कुशल बेन धाड़ीवाल, प्रतिभा कटारिया ने दीक्षार्थी की अनुमोदना में गीत प्रस्तुत किये.

एवं बेबी काव्या, मा. पारस धाड़ीवाल ने भी अनुमोदना की। नाहर परिवार की ओर से नगीन, सुभाष, नरेन्द्र, अजय नाहर एवं विजयमाला नाहर एवं परिवारजनों ने दीक्षार्थी अमित चौरडिय़ा एवं उनके पूज्य माता-पिता प्रकाशचन्द्र-अंगुरबाला एवं अतुल चौरडिय़ा का अभिनंदन पत्र भेंट कर भावभीना बहुमान किया।

अभिनंदन पत्र का वाचन नरेन्द्र नाहर ने किया। धर्मसभा को अशोक नवलखा ने भी सम्बोधित किया। दीक्षार्थी अमिता चौरडिय़ा ने अपने मार्मिक उद्बोधन में अपने पूज्य दादा-दादी, माता-पिता से विरासत में धर्मआराधना के संस्कार मिलने का अपना सौभाग्य माना।

प्रकाशचन्द्र चौरडिय़ा ने 4 दिसम्बर को हिण्डोन सिटी (राजस्थान) में दीक्षा प्रसंग पर सभी को पधारने का आमंत्रण दिया। संचालन जैनेन्द्र खेमसरा ने किया एवं आभार जवाहर डोसी ‘पीयूष’ ने माना।

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