bpl1भोपाल,  अवैध रुप से भारत में पाई गई उज्बेकिस्तानी महिला डी जुरायबा बार्नो के मामले में एसीजीएम अजय सिंह ठाकुर की अदालत में सुनवाई हुई. बार्नो जेल से अपनी दुधमुंही बच्ची के साथ अदालत लाई गई,सुनवाई के दोरान वह बार-बार अपनी बच्ची को संभाल रही थी.

उल्लेखनीय है कि जुरायवा के अधिवक्ता ने शासन के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का आवेदन पेश किया था. जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अपना फैसला जून तक सुरक्षित रख लिया है. बहस के दौरान जुरायबा के अधिवक्ता ने न्यायालय को बाताया कि जेल विभाग द्वारा जेल नियामावली का पालन नहीं किया जा रहा है और न सिर्फ भोपाल जेल में बल्कि यह व्यवस्था प्रदेश की सभी 124 जेलों में भी लागू नहीं है.

साथ ही अधिवक्ता द्वारा अदालत को बताया गया कि जेल में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और जेल नियामावली के अनुसार जेल कर्मी बंदी से वकील को बात करते हुए देख सकते है लेकिन दोनों की बातें नहीं सुन सकते, लेकिन जिला जेल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो इस नियमों का पालन करती है.

वकील ने कहा कि 9 दिसंबर 2015 को मिसरोद पुलिस ने संपत्ति जब्ती पत्रक में उजबेकिस्तान द्वारा जारी पासपोर्ट का उल्लेख तो किया, लेकिन उसे कोर्ट मे पेश नहीं किया. अदालत के तीन बार आदेश पत्र लिखने के बाद मिसरोद टीआई कुंअर सिंह मुकाती द्वारा 20 मई को पासपोर्ट न्यायालय में पेश किया गया.

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