sc1नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि बलात्कार के मामलों में आरोपी और पीडि़त के बीच कोई समझौता नहीं हो सकता. अगर ऐसा होता है तो इसे कानूनी मान्यता नहीं दी जाएगी और इस आधार पर आरोपी की सज़ा कम नहीं की जा सकती.

बलात्कार जिंदगी भर पीडि़त का पीछा नहीं छोड़ता. इस पाप में पीडि़त की कोई गलती न होने के बवाजूद हमारा समाज उसे स्वीकार नहीं करता. अगर पीडि़त की उमर कम हो तो उसकी शादी में कई अड़चनें आती हैं. अगर वो आर्थिक रुप से कमजोर हो तो उसकी जीविका का भी सवाल खड़ा होता है. ऐसे में कई बार अदालतें पीडि़त और आरोपी के बीच समझौते को बढावा देती हैं.

 

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