इस्लामाबाद,

पाक की राजधानी इस्लामाबाद में जारी विरोध और बवाल दूसरे दिन भी जारी रहा. इस्लामाबाद से सटे इलाकों में रविवार को प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों से भिड़ गए और कई गाडिय़ों को आग के हवाले कर दिया.

पुलिस ने बताया कि करीब दो सप्ताह से लगे कैंप्स को हटवाने की कार्रवाई से पहले प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया. मीडिया रिपोट्र्स की मानें तो इस संघर्ष में कम से कम छह लोगों की जानें गई हैं. हजारों पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद बड़ी मुश्किल से राजधानी का मुख्य मार्ग जामकर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाया जा सका.

प्रदर्शनकारियों ने कई दिनों से इस्लामाबाद और रावलपिंडी को जोडऩे वाले हाईवे को जाम कर रखा था. कार्रवाई में करीब 125 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं और यह संख्या बढ़ सकती है.

पुलिस अधीक्षक आमिर नियाजी ने बताया कि घायल होने वालों में सुरक्षा बलों के भी 80 सदस्य शामिल हैं. शनिवार रात सुरक्षाबलों ने कार्रवाई रोक दी थी और इस्लामाबाद में कानून-व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए सेना को बुलाया गया था.

सेना को शहर में स्थित संसद भवन, राष्ट्रपति और पीएम आवास, विदेशी मिशनों जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात किया जाएगा. दो शहरों के बीच फैजाबाद जिले में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने शिविर को घेर लिया था, लेकिन मौके पर मदद के लिए कोई सैन्य बल नहीं था.

इसके बाद सेना को बुलाया गया था. पीछे न हटने को तैयार तहरीक-ए-लब्बैक (टीएलपी) के प्रवक्ता एजाज अशरफी ने शनिवार को कहा था, हम हजारों में हैं. हम हार नहीं मानेंगे और अंत तक लड़ेंगे.
क्या है बवाल की वजह

प्रदर्शनकारियों का मानना है कि चुने हुए प्रतिनिधियों के शपथ वाले नियम में इलेक्शन ऐक्ट 2017 के अधिनियम के तहत मोहम्मद साहब की सर्वोच्चता को चुनौती दी गई है. हालांकि सरकार ने इसे एक मानवीय भूल बताया था. सरकार संसद के एक ऐक्ट के तहत इसमें सुधार कर चुकी है. पर प्रदर्शनकारी कानून मंत्री जाहिद हामिद के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं.

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