दिनोंदिन बढ़ते प्रदूषण से निजात पाने के लिए भी आखिर अदालत को ही आगे आने पड़ा. अदालती आदेश के अनुपालन में सरकार भी कदम उठाने को विवश हुई. नतीजतन ऑड एंड इवन यानी सम-विषम का फार्मूला सामने आया. हालांकि यह कोई नया फार्मूला नहीं है. अनेक देशों में यह नियम
कई सालों से सफलतापूर्वक चल रहा है. लेकिन चूंकि यहां के लिए यह नया था इसलिए कुछ विरोधी तत्व तत्काल सक्रिय भी हो गए. लेकिन सरकार पीछे नहीं हटी. और हटती भी कैसे, सामने कोर्ट का चाबुक जो था.

बहरहाल, दिल्ली सरकार ने इसके लिए पूरा होमवर्क किया. और येन केन प्रकारेण दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए हर संभव प्रयास किए. सीएनजी किट लगाने को भी बढ़ावा दिया. हां, प्रमुख व्यक्तिओं यानी वीवीआईपीज के साथ ही महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों को ऑड-इवन से थोड़ी राहत की घोषणा कर दी.

लेकिन कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठा दिए. आखिर महिलाओं बच्चों को इससे छूट क्यों. इतना ही नहीं, वकीलों द्वारा इस फार्मूले से छूट के लिए दाखिल की गई याचिका भी खारिज कर दी. इसके साथ ही जोर-शोर से तैयारी शुरू हो गई और नए साल में इसे लागू भी कर दिया गया. शुरू में लोगों ने इसका विरोध जरूर किया पर धीरे-धीरे लोग अब इसकी महत्ता समझने लगे कि आखिरकार यह उन्हीं के भले के लिए है.

मुख्यमंत्री का पूल कर सड़कों पर निकलना, उप मुख्यमंत्री का साइकिल से सचिवालय जाना और परिवहन मंत्री का बस से घूमना भी लोगों के लिए एक उदाहरण बना. हालांकि, इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मेट्रो में सफर कर चुके हैं. इतना ही नहीं, बिहार के एक मंत्री ने छुट्टियों में अपने घर जाने के लिए लोकल ट्रेन में सफर किया. इसका समाज में एक सकारात्मक संदेश गया.

भले ही यह कदम देर से और अदालत के हस्तक्षेप के बाद उठाया गया हो पर यह यह पूरी तरह मानव हित में उठाया गया कदम है. साफ हवा और पानी जैसी नैसर्गिक चीजों पर तो सबका हक है. और हो भी क्यूं न. हालांकि, आम आदमी पार्टी को इस निर्णय का एक भय भी सता रहा है कि कहीं इसका असर अगले साल होने वाले चुनाव में न देखना पड़े लेकिन इसका यह सकारात्मक पहलू भी यह है कि तब तक लोगों को यह समझ में आ जाएगा कि यह निर्णय उनके और उनके बच्चों के हित के लिए उठाया गया कदम है. जिसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे.

वैसे कोर्ट भी अभी 15 दिनों के लिए शुरू किए गए इस प्रयोग पर नजरें जमाए हुए है. इसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा. अभी तो उसने महिलाओं और बच्चों को दी गई छूट पर ही सवाल खड़ा कर दिया है. कोर्ट का मानना है कि नियम तो सभी के लिए एक समान होना चाहिए. यही नहीं, इस नियम को तो पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए. ताकि बढ़ते प्रदूषण को एक स्तर पर थामा जा सके. और लोगों को दिल्लीवासियों की तरह इसे अपनाने की पहल की जानी चाहिए.

क्योंकि प्रदूषण तो सभी शहरों के लिए एक समस्या बनती जा रही है. अभी तो फिलहाल कोर्ट ने दिल्ली में ही प्रदूषण कम करने के लिए डीजल गाडिय़ों के पंजीकरण पर भी रोक लगाई है. जबकि इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाना चाहिए. हालांकि, कुछ कार निर्माताओं ने कोर्ट से मिलकर

गुहार लगाई है कि उनकी गाडिय़ां पेट्रोल गाडिय़ों से भी कम प्रदूषण फैलाती हैं पर कोर्ट ने उनका यह तर्क अभी स्वीकार नहीं किया है. दिल्ली सरकार के बाद अब जल्द ही इसे उत्तर प्रदेश में भी लागू किए जाने की संभावना है क्योंकि वहां के मुख्यमंत्री पहले ही प्रदूषण कम करने के लिए साइकिल ट्रैक के प्रति अपनी भावना जाहिर कर चुके हैं. अब देखना यह है कि समूचे देश में यह योजना कब तक कार्यान्वित होती है. ताकि अकेले दिल्ली को ही नहीं वरन पूरे देश को इस समस्या से राहत मिल सके.

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