strikeनयी दिल्ली,  देश के लगभग 21 करोड़ श्रमिक अपनी 12 सूत्री मांगों के समर्थन में और नरेन्द्र माेदी सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों तथा निर्णयों के खिलाफ आज एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर है। असंगठित क्षेत्र के मजदूर संगठनों ने हड़ताल का समर्थन किया हैं। दस प्रमुख केन्द्रीय श्रमिक संगठनों के आयोजित इस हड़ताल से आवश्यक सेवाओं से मुक्त रखा गया है।

बैंक, बीमा, डाक, परिवहन, बाजार, खनन उद्योग तथा कुछ अन्य क्षेत्रों पर हड़ताल का असर देखा जा रहा है। सुबह से ही जगह-जगह श्रमिक जुलूस निकाल रहे है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी समर्थित भारतीय मजदूर संघ ने हड़ताल से बाहर रहने का निर्णय लिया है। अखिल भारतीय उद्योग संघ कांग्रेस और केंद्रीय श्रम संगठनों के संघ सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने कहा कि सरकार उनकी मांगाें को पूरा करने में नाकाम रही है। श्रम संघ 40 कर्मचारियों वाले कारखानों को श्रम कानूनों से बाहर रखने के सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

साथ ही उन्होंने देश की सुरक्षा को खतरा होने के आधार पर विशेषकर फार्मास्युटिकल,रेलवे और रक्षा क्षेत्रों में विदेशी निवेश का भी विरोध किया है। दिल्ली में श्रमिक संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए। सीटू के महासचिव तपन कुमार सेन और अन्य श्रमिक नेताओं ने संबोधित किया। इन नेताओं ने कहा कि जब तक श्रमिक विरोधी नीतियों को सरकार जारी रखती है तब तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार आक्रामक तरीकों को आर्थिक सुधारों को लागू कर रही है और इनसे श्रम हितों पर प्रहार किया जा रहा है। देश के सभी भागों से श्रमिकों के विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं।

सभी राज्यों की राजधानी और जिला मुख्यालयों में भी श्रमिक संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों ने प्रदर्शन किया और कारखानों के मुख्य द्वार पर सभा की। कुछ राज्यों में परिवहन व्यवस्था ठप हैं। हरियाणा पथ परिवहन निगम के कर्मचारी भी हड़ताल पर है। इससे दिल्ली और आसपास क्षेत्रों में भी इसका असर देखा गया।

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