bpl1भोपाल,  श्री गुरुनानक देव जी का 547वां प्रकाश उत्सव पर्व आज राजधानी भोपाल के गुरुद्वारा पिपलानी में श्रद्धाभक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया.
गुरुनानक नामलेवा श्रद्धालु सुबह से ही लम्बी-लम्बी कतारों में गुरुद्वारा पिपलानी पहुंचे और गुरुग्रंथ साहब के चरणों में 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माथा टेककर अपनी श्रद्धा के फूल भेंट किये और गुरु का अटूट लंगर बांटा गया. गुरुद्वारा पिपलानी के ग्रंथी ज्ञानी जसबीर सिंघ ने देश की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं देश के सभी वर्गों की तरक्की और सर्वत्र के भले के लिये अरदास की.

प्रवक्ता गुरुचरण सिंघ अरोरा ने बताया कि विशेष रूप से रागी जत्था भाई साहब भाई सतङ्क्षवदर सिंघ जी माछीवाड़ा पंजाब एवं कथा वाचक, प्रचारक लोकेन्द्र ङ्क्षसघ जी दिल्ली एवं हजूरी रागी जत्था भाई मोहन ङ्क्षसघ जी एवं अखंड कीर्तनी जत्था स्त्री ससंग भोपाल समूह संगत को गुरुचरणों के साथ में जोड़कर संगत को निहाल कर दिया.

कीर्तन हुए
रागी जत्था भाई सतङ्क्षवदर सिंघ जी माछीवाड़ा पंजाब ने कहा कि गुरु जेसा नाहीं कोई देव, जिस मस्तक भाग सो लागा सेव. सतगुरु मेरा सरब प्रतिपाले, सतगुरु मेरा मार जिवाले, सतगुरु मेरे की वडिआई, प्रगट भई सवाले जुगे अन्दर. उन्होंने आगे कीर्तन में कहा कि नानक नाम चड़दी कला, तेरे भाने सरबत का भला.

उन्होंने कीर्तन में कहा कि भिखारी से राज करावे और राजा से भिखारी बनावे, यह परमाता के हुक्म से होता है. उन्होंने कीर्तन में कहा कि सुनी अरदास स्वामी मेरे, सगल कला बन आई, प्रगट भई सगले सुग अन्दर, गुरुनानक की वडियाई. उन्होंने कहा कि गुरुनानक देवजी मक्का, मदीना व बगदाद गये थे व वहां के काजी के साथ का किस्सा सुनाते हुये बताया कि दूध में घी है और लकड़ी में आग है पर वह हमें दिखाई नहीं देती पर होती उसी में है. उन्होंने कहा कि रब सबमें होता है वह हमें प्रगट करना पड़ता है. जो इंसान गुरु के (परमात्मा) के दर्शन कर लेता है उसको जनम-मरण से मुक्ति मिल जाती है.

नानक जी के विचारों को हृदय में बसाएं
कथावाचक भाई लोकेन्द्र सिंघ जी दिल्ली ने कहा कि गुरुनानक के विचारों को हमें अपने हृदय में बसाना चाहिये. हमें अपनी नीयत साफ रखनी चाहिये और धरम के मार्ग पर चलना चाहिये. गुरुनानक ने निर्मल पंथ चलाया. उन्होंने कहा कि गुरु का पर्व तब सफल होगा जब हम गुरुनानक जी के बताये गये मार्ग पर चलेंगे.

Related Posts: