नीति आयोग की बैठक में हुआ खुलासा,

प्रदेश के 8 पिछड़े जिलों में विदिशा टॉप पर

विदिशा,नवभारत न्यूज.

दिल्ली मेें नीति आयोग की हाल ही में हुई बैठक में देश के 115 पिछड़े जिलों में प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान का गृहजिला और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का संसदीय क्षेत्र विदिशा का नाम सर्वाधिक पिछड़े जिलों में शामिल है. जिसने विदिशा के विकास के दावों की पोल खोल दी है.

ऐसे में जिले से जुड़े बड़े जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिये यह गंभीर चिंता का विषय है. क्योंकि आगामी चुनावों में यहां की जनता ऐसे जनप्रतिनिधियों को सबक सिखा सकती है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना देश के 75 वे स्वतंत्रता दिवस सन 2022 तक नये भारत का निर्माण करना है, जिसके तहत योजना आयोग का नाम परिवर्तित कर नीति आयोग बनाया गया है. जिसका काम देश में नीति बनाने सहित उनके क्रियान्वयन पर नजर रखना है.

देश को आगे बढऩे में बन रहे बाधक-

दिल्ली में आयोजित उक्त नीति आयोग की बैठक में आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि पौषण, गरीबी, शिक्षा, युवा रोजगार को टारगेट कर 115 जिलों का सर्वे किया गया है.

यह जिले देश को आगे बढऩे में बाधक हैं इनके नाम लेना इसलिये जरूरी था कि राजनैतिक और प्रशासनिक अधिकारी एवं नेता जो इस क्षेत्र से जुड़े हैं उन पर भी जुर्माना हो सकता है.

कागजों पर दौड़ रहीं योजनायें-

लोगों का कहना है कि जिले में विकास की गंगा बहाने के लिये वरिष्ठ नेताओं द्वारा वर्षों से अनेक घोषणायें की जा रही हैं. वहीं प्रत्येक सप्ताह के सोमवार को जिला प्रशासन समीक्षा बैठक आयोजित करता है.

इसके साथ ही समय-समय पर जिला योजना समिति की बैठक के साथ ही अन्य बैठकें आयोजित होती हैं, जिसमें जिले की योजनाओं के साथ ही विभिन्न विकास कार्यों पर चर्चा और उनकी समीक्षा की जाती है.

लेकिन इसके बाद भी विदिशा देश और प्रदेश के पिछड़े जिलों में शामिल है, जिससे जहां विकास के दावों की पोल खुल गई है, बैठक में 115 पिछड़े जिलों में से 35 जिले नक्सलवाद,वामपंथी व अलगावबाद से प्रभावित पाये गये हैं.

बांकी 80 पिछड़े जिलों में मध्य प्रदेश के 8 जिलों को शामिल किया गया है जिनमें विदिशा, गुना, बड़वानी, दमोह, खंडवा, सिंगरोली, छतरपुर, राजगढ़ शामिल हंै.

 

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