modiविशाखापत्तनम,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्र के जरिए होने वाली आतंकवादी गतिविधियों और समुद्री डकैती को समुद्री सुरक्षा के लिए दो सबसे अहम चुनौती करार दिया। दक्षिण चीन सागर विवाद की पृष्ठभूमि में मोदी ने नौवहन की आजादी का सम्मान करने की भी वकालत की।

दुनिया ने देखी भारतीय नौसेना की ताकत 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमले की ओर इशारा करते हुए मोदी ने रविवार को कहा कि भारत समुद्र के जरिए पैदा होने वाले खतरे का सीधे तौर पर पीड़ित रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र के जरिए पैदा होने वाले खतरे ने अब भी क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति तथा स्थिरता को खतरे में डाल रखा है।

मोदी ने कहा कि सोमालियाई समुद्री लुटेरों की ओर से भारत सहित अन्य देशों के व्यापारिक पोतों को निशाना बनाए जाने की पृष्ठभूमि में समुद्री डकैती भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने दक्षिण चीन सागर विवाद की ओर परोक्ष तौर पर इशारा करते हुए कहा कि देशों को ‘नौवहन की आजादी का सम्मान करना चाहिए और इसे सुनिश्चित करना चाहिए तथा उन्हें प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि सहयोग करना चाहिए।’

मोदी ने कहा कि तीसरे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन और भारत-प्रशांत द्वीपीय सहयोग की मेजबानी करने के बाद भारत अप्रैल में पहले वैश्विक समुद्री शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। अपनी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ पहल का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि फ्लीट रिव्यू में हिस्सा ले रहे 37 भारतीय जंगी जहाज भारत में बने हैं और इनकी संख्या में निश्चित तौर पर इजाफा होगा।

मोदी ने कहा कि महासागरों से आर्थिक लाभ प्राप्त करने की राष्ट्र की क्षमता हमारी इस काबिलियत पर निर्भर करती है कि हम समुद्री दायरे में आने वाली चुनौतियों से किस तरह निपटते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सुनामी और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदा के खतरे हर वक्त मौजूद हैं। तेलों के रिसाव, जलवायु परिवर्तन जैसी मानव निर्मित समस्याएं समुद्री क्षेत्र की स्थिरता के लिए जोखिम बने हुए हैं।

Related Posts: