arunनई दिल्ली,  जेएनयू में देशद्रोही नारे लगाए जाने के मामले में संसद में गुरुवार को भी जोरदार बहस देखने को मिली. राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी की ओर से इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी निर्दोष को नहीं फंसाया जाना चाहिए.

आजाद ने कहा कि हम 9 फरवरी को हुई घटना का विरोध करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की गलती की सजा दूसरे लोगों को न दी जाए. इसके जवाब में सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बात रखी. पूरी तैयारी के साथ सदन में आए जेटली ने कहा कि बड़ा सवाल यह है कि क्या हम उन लोगों को सम्मान देने जा रहे हैं, जिनकी विचारधारा देश को तोडऩे की है. जेटली ने कहा कि कांग्रेस ने आतंकवाद के चलते दो प्रधानमंत्री खोए हैं, उन्हें हमसे भी तीखा निंदा करनी चाहिए.

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर याकूब मेमन की शहादत मनाए जाने पर निशाना साधते हुए जेटली ने कहा कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाई थी, कई राउंडों में उसकी याचिका पर विचार किया गया. आधी रात में भी उसकी याचिका पर सुनवाई की गई, लेकिन ऐसे आतंकियों की शहादत मनाई जा रही है, इसे क्या कहा जाएगा. क्या कोई यह कह सकता है कि उसकी शहादत मनाई जाए. जेटली ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कभी अराजक तत्वों का समर्थन नहीं किया.

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