mp1इंदौर, आध्यात्मिक गुरू और ऑर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर का कहना है कि धर्म वही जो हमको थामे रखे. क्षमा ही धर्म है. हमाने मन में सबके कल्याण की भावना होनी चाहिये. अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए श्री श्री ने कहा कि शुद्धता भी धर्म है. इन्द्रियों पर काबू रखना धर्म है . इस प्रकार के 10 धर्म हैं.

बुद्धिमान ही धार्मिक हो सकते हैं. बेवकूफ धार्मिक नहीं हो सकते . धर्म के अभाव के कारण चोरी और दूसरी घटनाएं हो रही हैं. औरों के काम आ जाएं हम यह भाव सबके दिल में हो. हम सबके काम आएं यही उदगार होना चाहिये. चिंतन देश में सदियों से बने हुए हैं . दुनिया में एक्सपो की कल्पना कुम्भ मेले में हुई . भारत का दिल मध्य प्रदेश ही है. आज धर्म के अभाव के कारण आत्महत्या हो रही है और भ्रष्टाचार फैल रहा है. राज धर्म , समाज धर्म और मानव धर्म में धर्म का पोषण करें.

 

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