नई दिल्ली. अच्छी बारिश और सरकार द्वारा दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में जोरदार वृद्धि किए जाने से चालू खरीफ सत्र में अब तक दलहन बुआई?80 फीसदी बढ़कर 11.04 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है लेकिन धान बुआई?का रकबा घट रहा है। कृषि सचिव सिराज हुसैन ने कहा,दलहनों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि के साथ-साथ खुदरा कीमतों में वृद्धि ने किसानों को दलहन बुआई के रकबे में वृद्धि के लिए उत्साहित किया है।

हुसैन ने कहा कि दलहन की अधिक बुआई काफी महत्त्वपूर्ण है। अगर इसका घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो दलहन की कीमतों में कोई मुद्रास्फीतिकारी प्रवृत्ति नहीं होगी। देश में करीब 1.7 से 1.9 करोड़ टन दलहन का उत्पादन होता है लेकिन अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिएकरीब 40 लाख टन दलहनों का आयात करना पड़ता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार दलहन का रकबा बढ़कर 11.04 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। एक साल पहले इस समय तक 6.14 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। केंद्र सरकार ने दलहनों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इस बार 275 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है। तिलहनों, मोटे अनाज और कपास की बुआई भी पिछले साल से तेज है।

तिलहन का रकबा अभी तक लगभग 5 गुना बढ़कर 27.89 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वर्ष भर इसी अवधि में इसकी बुआई 5.29 लाख हेक्टेयर में हो सकी थी। तिलहनों की अधिक बुआई अच्छी खबर है क्योंकि हर वर्ष 1.1 करोड़ टन से भी अधिक वनस्पति तेल का आयात करता है। मोटे अनाज की बुआई 19.28 लाख हेक्टेयर और कपास 34.87 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। हालांकि धान का रकबा अभी अपेक्षाकृत कम है। अभी 23.28 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक धान का रकबा 25.04 लाख हेक्टेयर था। सचिव ने कहा कि धान के संदर्भ में चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में अभी भी बुआई शुरू की जानी है।

राज्यों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अब तक कुल बुआई?का रकबा 165.62 लाख हेक्टेयर है जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 134.18 लाख हेक्टेयर था। हुसैन ने कहा कि भारत के स्तर पर खरीफ बुआई में तेजी आई है। कुल खरीफ बुआई का करीब 16 फीसदी काम पूरा हो गया है। सचिव ने यह भी सूचित किया कि धीमी शुरुआत के बावजूद देश में मानसून की प्रगति पर्याप्त अच्छी है। उन्होंने कहा कि बारिश की स्थिति में सुधार हुआ है और पूरे देश के स्तर पर एक से 24 जून के दौरान बारिश सामान्य से 24 फीसदी अधिक रही है। उन्होंने सूचित किया कि प्रमुख जलाशयों में जल उपलब्धता की स्थिति में भी सुधार है।

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