दीर्घकाल तक यह समझा गया कि बिजली और बैंक सिर्फ शहरों की जरूरत है लेकिन सांसारिक विकास के साथ अब यह दोनों ही सेवा व वस्तु आम जिंदगी की नितांत आवश्यक जरूरत हो गयी है. ये विकास का मानदंड और मापदंड है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते अपने पहले ही स्वाधीनता दिवस संबोधन में हर व्यक्ति का बैंक खाता के लिये जन-धन योजना की घोषणा
कर दी.

लेकिन अभी तक यह माना जाता है कि हवाई सेवा या हवाई यातायात केवल बहुत बड़े शहरों और अंतरराष्टï्रीय आवागमन के लिये है और समाज के धनाढ्य वर्ग तक सीमित सेवा है. मध्यम वर्ग के लिये यह अभी भी ‘हवा-हवाईÓ है. लेकिन मोदी सरकार की यह नीति व प्रयास सराहनीय है कि हवाई यात्रा इस युग में आम जरूरत हो गयी है और इसे मध्यम वर्ग तक पहुंचाना है. अभी भी भारत में उच्च मध्यम वर्ग के केवल 7 प्रतिशत व्यक्ति ही असाधारण जरूरत बीमारी या विदेश जाने के लिये हवाई यात्रा करते है. वह भी कभी-कभी मजबूरी की हालत होती है. अब जो नयी हवाई सेना नीति लायी गयी है उसमेें हवाई सेवा को राज्यों तक पहुंचाना है. इस समय देश में 400 छोटे हवाई अड्डïे या हवाई पट्टिïयां ऐसी है जो काम में नहीं आ रही है. उन्हें सरकार बजट हवाई अड्डïे के रूप में पुन: हवाई सेवा के विस्तार के लिये काम में लेगी. इसके लिये धन की व्यवस्था भी प्रचलित हवाई सेवाएं में बड़े शहरों के बीच और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर 2 प्रतिशत ‘सैसÓ (उपकर) लगाया जायेगा जिसने हर साल 1500 करोड़ रुपयों की आय होगी. इस राशि से क्षेत्रीय सम्पर्क बढ़ाना, सस्ते और हर शहर में सुलभ हवाई अड्डों की स्थापना और विमान कम्पनियों का वित्त पोषण किया जायेगा. इसमें एक घंटे की उड़ान का अधिकतम 2500 रुपये की सीमा तय कर दी जायेगी. विमान के ईंधन पर एक प्रतिशत वेट घटाने का भी
प्रस्ताव है.

अभी हमें विश्व स्तर पर भी हवाई सेवाओं में काफी विस्तार करना है. इस समय देश में 85 अन्तरराष्ट्रीय विमान कम्पनियों की हवाई सेवा आती है. भारत की 5 विमान कम्पनियों की उड़ानें 40 देशों में जा रही हैं. नयी नीति में यह प्रावधान किया जा रहा है कि विमानन सेवा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश थोड़ा और बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया जाए और दूसरे देशों से आपसी हवाई सेवा के ऐसे करार किये जायें कि वे एक-दूसरे के देशों से निर्बाध रूप में अपनी कितनी भी उड़ानें भेज सकें.
आजादी के समय भारत में निजी क्षेत्रोंं में टाटा व बिड़ला उद्योग घरानों द्वारा टाटा एयरवेज और भारत एयरवेज के नाम से दो हवाई कम्पनियां लाभ में चलते हुए उन्नत सेवाएं दे रही थीं, आजादी के बाद प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने समाजवाद और राष्ट्रीयकरण की नीति में इन दोनों हवाई कम्पनियों का राष्टï्रीयकरण एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स अन्तरराष्ट्रीय व घरेलू हवाई सेवा के लिये बना दी. लेकिन टाटा एयर इंडिया के अध्यक्ष बने रहे. किन्हीं पूर्वाग्रहों के कारण सन् 1977 में जनता पार्टी सरकार में प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने श्री टाटा को हटा दिया.

उसके बाद से एयर इंडिया व इंडियन एयरलाइन्स लडख़ड़ा कर भारी घाटे के हो गये और उन्हें कई बार बजट से वित्तीय सहायता देनी पड़ी. अब फिर देश में हवाई सेवा में निजी क्षेत्र वापस आ गया है और नई नीति भी मध्यम वर्ग के पास आ रही है.

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