नई दिल्ली,

नए साल पर नया घर लेने के लिए आपको पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे। दरअसल प्राइवेट रियल इंस्टेट डेवलपर्स की प्रमुख बॉडी कान्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई) ने ऐसी आशंका जताई है।

क्रेडाई ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि उत्पादन की लागत बढऩे की वजह से प्रोपर्टी की कीमते बढ़ सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो रियल इस्टेट पर दबाव बढ़ सकता है।

क्रेडाइ चेन्नई के अध्यक्ष सुरेश कृष्ण ने कहा कि कच्चे माल की कीमतो में इजाफा हो गया है। बालू पहले 35 रुपए घनफुट के हिसाब से मिलती थी लेकिन अब दाम बढ़कर 135 रुपए घनफुट पहुंच गया है। सीमेंट के दाम 270 रुपए से बढ़कर 330 रुपए हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है उससे संपत्ति की कीमतों में इजाफा होना तो तय है।

कृष्ण ने बताया कि इस्पात के दाम 34,000 रुपए प्रति टन से बढ़कर 47,000 रुपए प्रति टन हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में हो रही बढ़ोत्तरी से निर्माण की प्रति वर्ग फुट लागत 400 रुपए तक बढ़ सकती है।

सुरेश कृष्ण ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि जीएसटी के बाद प्रोपर्टी की कीमतें नीचे आएंगी, लेकिन कच्चे माल की कमी की वजह से ग्राहकों को इसका फायदा उठाने में दिक्कत पेश आ रही है। उन्होंने आगे कहा कि कच्चे माल की बढ़ी हुई कीमतों का दबाव ग्राहकों पर डालना ही पड़ेगा। गौरतलब है कि संपत्ति की कीमतें बढ़ती है तो ये रियल स्टेट सेक्टर के सामने कई सारे दिक्कते आती हैं।

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