पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी आदिवासी क्षेत्र से प्रारंभ हुआ महुआ नक्सल आतंक आगे बढ़ता हुआ इन दिनों छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में गढ़चिरोली और मध्यप्रदेश में बालाघाट तक आ चुका है. राजधानी भोपाल में इनकी हथियार बनाने की फैक्ट्री भी काफी दिनों पकड़े जाने तक चलती रही. इसके फैक्ट्री को चलाने वाले अभी भी भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद है.

बालाघाट में ये कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल के मंत्री लिखीराम कांवरे की हत्या उन्हीं के गांव में जाकर कर चुके हैं, जब श्री कांवरे वहां दौरे पर गये थे. इन लोगों के कब्जे के इलाके को ‘लाल गलियारा’ कहा जाता है जहां कोई भी खदान, उद्योग, ठेकेदारी व व्यापार करने वाला व्यक्ति वहां इन्हें ‘चौथ’ दिये बिना धंधा नहीं कर सकता. रुइया ग्रुप का लौह खनन करने वाला इस्सार उद्योग उन्हें 16 लाख रुपया फिरौती देते पकड़ा गया. अब फिरौती बंद हो गयी तो ये नक्सली आयरनओर से लदे कई ट्रकों को विस्फोट से उड़ा चुके हैं.

इन दिनों यह हो रहा है कि अब ये छत्तीसगढ़ और गढ़चिरोली के बाद मध्यप्रदेश में मंडला, छिंदवाड़ा जिलों में सक्रिय हो रहे हैं. कम आबादी वाले घने जंगलों के गांवों में नक्सली पहुंच गये हैं और यदि समय रहते इन्हें रोका नहीं किया गया तो यहां भी आंध्र के वारंगल और छत्तीसगढ़ के सुकमा की तरह मध्यप्रदेश में भी इनके हमले और समानान्तर सरकार चलने लगेगी.

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