छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने एक के बाद एक लगातार 4 दिनों तक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल पर हमले किए, 17 ट्रकों की पूरी लाइन में आग लगा दी, पुलिस का एन्टी माइन ट्रक-वाहन ही माइन ब्लास्ट से उड़ा दिया. पहले दिन की घटना के प्रतिक्रिया में केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह यह भर कह पाए कि ‘नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ दें.Ó कभी सीधी सच्ची बात भी यह गलत वक्त गलत संदर्भ में कहीं जाए तो बुरी लगने से ज्यादा प्रतिकूल असर करती है. इसके बाद भी नक्सलियों ने दूसरे, तीसरे और चौथे दिन में केंद्रीय श बलों की टुकडिय़ों पर जोरदार हमले किये. कई जवान मारे गये और कई घायल हो गये. आम धारणा यही बनती है कि क्या सरकार उपदेशों के जरिये नक्सलियों से रहमो-करम, मेहरबानी …… रही है और ‘हृदय परिवर्तनÓ से समाधान ढूंढना चाहती है.
पहली घटना उसी सुकमा जिले में हुई जहां के कलेक्टर को नक्सली एक सरकारी समारोह में उसके दोनों गनमेन को गोली मारकर बाइक पर बिठाकर ले गये थे. यहां एक पार्टी समारोह में लौटते समय कांग्रेस के कई दिग्गज नेता घात लगाकर किये गये नक्सली हमले में मारे गये थे. इतना सब होने के बाद भी आज भी वहां नक्सली ही केंद्रीय सश बलों पर भारी पड़ रहे हैं.

पहले हमले में 7 केन्द्रीय रिजर्व बल के 7 जवान मारे गये और 11 घायल हुए. नक्सली हमलों के चलते मृतकों व घायलों को वहां से निकालना तक भारी पड़ गया. दूसरे दिन के हमले में 18 ट्रकों की लाइन में आग लगा दी. 72 घंटों में 4 हमले किये गये, लगभग 400 नक्सलियों के हथियारबंद लोग सक्रिय रहे. सीमा सुरक्षा बल के केम्प पर हमला हुआ- 4 जवान मार दिये और 11 घायल हो गये.
नक्सलियों ने अपने प्रभाव का एक रेड कोरीडोर बना लिया है और इनका प्रभाव नये-नये इलाकों में बढ़ता जा रहा है. कभी पश्चिम बंगाल में चारू मजूमदार के रहनुमाई में शुरू हुए थे और बिहार झारखंड, ओड़ीसा होते हुए एक अरसे तक आंध्र में काबिज हो गये- वारंगल जिला को इनकी राजधानी कहा जाता था. इन दिनों छत्तीसगढ़ में पूर्ण सक्रिय हैं और महाराष्टï्र में गढ़चिरोली और मध्यप्रदेश में बालाघाट में आधार जमा रहे हैं. लंका में पूर्व राष्टï्रपति श्री महेंद्रा राजपक्षे एक मिसाल बन गये हैं कि उन्होंने सेना का संयुक्त कमांड बनाकर 25 साल तक पूर्वी लंका में समानान्तर सरकार के रूप में जम चुके लिट्टे आतंकवादी संगठन को जड़ से खत्म कर दिया. इससे पहले भारत के पंजाब राज्य में भिंडरवाले ने रोज लोगों को मार देने का आतंक जमा लिया था. उस हिंसात्मक दौर को भी सेना के अभियान से खत्म किया गया था.

मोदी सरकार ने केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री के रूप में भूतपूर्व सेनाध्यक्ष श्री वी.के. सिंह ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ही कह रहे हैं कि नक्सलियों के खिलाफ सेना के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है. लेकिन नक्सली समस्या का समाधान भी ‘खालिस्तानÓ व लिट्टïे के सफाये के लिये संयुक्त सैनिक कमांड बनाकर करना ही कारगर होगा. अब प्रधानमंत्री श्री मोदी ही यह बतायें कि आठ राज्यों में फैले नक्सली क्षेत्रों में कब क्या करना चाहते हैं. नक्सलियों ने उन्हीं इलाकों में कब्जा जमाया है जिन क्षेत्रों में खनिज सम्पदा का अपार भंडार है- वहां नक्सलियों के रहते ‘मेक इन इंडियाÓ तक भी नहीं पहुंच पायेगा.

Related Posts: