नयी दिल्ली,

उच्चतम न्यायालय ने देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की वरीयता की एक बार फिर तसदीक करते हुए विभिन्न पीठों को मुकदमों के आवंटन के लिए एक प्रणाली विकसित करने संबंधी जनहित याचिका आज खारिज कर दी।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ृ की पीठ ने लखनऊ के वकील अशोक पांडे की याचिका को ‘निंदात्मक’ करार दिया।

पीठ की ओर से न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संक्षिप्त फैसला सुनाते हुए कहा, “संस्थागत दृष्टि से उच्चतम न्यायालय के कामकाज के नियंत्रण के लिए सीजेआई ही अधिकृत होते हैं। मुख्य न्यायाधीश खुद ही एक संस्था है।” शीर्ष अदालत ने सीजेआई द्वारा कामकाज के मनमाने तरीकों को अपनाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीजेआई सर्वोच्च संवैधानिक अधिकारी हैं।

 पीठों को मुकदमे आवंटित करने का संवैधानिक अधिकार सीजेआई में सन्निहित है। उन्होंने कहा, “सीजेआई के खिलाफ अविश्वास की बात नहीं की जानी चाहिए।”

याचिकाकर्ता ने मुकदमों के बंटवारे के लिए एक नये सिरे से नियम कानून तैयार करने का आग्रह किया था।

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