bpl2भोपाल,  नर्मदा के 22 लाख हैक्टेयर कैचमेंट में से जिस 5 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को संरक्षित करने की जरूरत है, सरकार उसी मेें रेत खनन की मंजूरी दे रही है.
अलीराजपुर, खरगौन, धार और बड़वानी में नर्मदा नदी के किनारे लगातार रेत का अवैध खनन हो रहा है. कई क्षेत्र तो ऐसे हैं, जहां मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीपीसीबी)और मध्यप्रदेश स्टेट एन्वायर्नमेंट इम्पेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) ने खनन की मंजूरी दी ही नहीं.

यहां तक की अलीराजपुर के आदिवासी क्षेत्र में आने के बावजूद रेत खनन के लिए ग्राम सभाओं की भी अनुमति नहीं ली गई है. नर्मदा बचाओ आंदोलन की सक्रिय कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने अवैध रेत खनन की यह हकीकत शुक्रवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताई। इस दौरान उन्होंने एमपीसीसी, सिया, खनन विभाग, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए. इस मामले में पाटकर के तमाम आरोपों और दलीलों को गंभीरता से लेकर एनजीटी ने वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता की अध्यक्षता में में जांच कमेटी गठित कर दी है.

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