Naveen-Jindalनयी दिल्ली 20 जुलाई. उच्चतम न्यायालय ने ओडिशा के उत्कल बी-1 एवं बी-2 कोयला खदानों तथा छत्तीसगढ़ के गारे पालमा खदान मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आज आदेश दिया. साथ ही जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के मालिक नवीन जिंदल को नोटिस भी जारी किया. दिल्ली उच्च न्यायालय ने इन खदानों को नीलामी प्रक्रिया से अलग करने का निर्देश दिया था.
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की याचिका पर जेएसपीएल और उसके प्रवर्तक जिन्दल को नोटिस जारी किये.

केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय के 11 फरवरी के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें तकनीकी समिति को ओडिशा में दो कोयला खदानों उत्कल बी-1 और बी-2 के मामले में अंतिम उपयोग के अपने फैसले पर पुनर्विचार का निर्देश दिया गया था. जेएसपीएल ने उच्च न्यायालय में दलील दी थी कि इन खदानों के अंतिम उपयोग को इस्पात और लोहे की बजाय बिजली में तब्दील करने के कारण उन्हें इसमें बोली लगाने से रोका गया है. ये दो खदानें पहले जेएसपीएल को आवंटित की गयी थीं, लेकिन शीर्ष अदालत ने 214 खदानों के साथ ही इन्हें भी निरस्त कर दिया था. बाद में जब इनकी फिर से नीलामी की घोषणा हुई तो उनका अंतिम उपयोग इस्पात और सीमेन्ट से बदलकर बिजली कर दिया गया.

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