गैंगरेप केस: दिल्ली पुलिस की सफाई

Delhi police_Damini Caseनई दिल्ली, 5 जनवरी. पूरे देश में आक्रोश का ज्वार पैदा करने वाली दिल्ली गैंगरेप की घटना के अकेले चश्मदीद अवींद्र पांडे के बयान पर दिल्ली पुलिस ने सफाई दी है। पीडि़ता के मित्र की ओर से लगाए आरोपों पर सफाई देते हुए दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि इस मामले में पुलिस कार्रवाई में देरी नहीं हुई। दिल्ली पुलिस का कहना है कि पीडि़ता एवं उसके मित्र को 16 मिनट के भीतर सफदरगंज अस्पताल पहुंचाया गया।

दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त विवेक गोगिया ने दिल्ली गैंगरेप मामले में पीडि़ता के मित्र के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पुलिस कर्मियों के बीच कोई बहस नहीं हुई। रात 10:27 बजे मौके पर पहली पुलिस पीसीआर वैन पहुंची थी।  पीसीआर वैन के लिए क्षेत्रीय सीमा निर्धारित नहीं होती है। विवेक गोगिया ने कहा कि घटना की रात 10.21 बजे इस मामले को लेकर पहली कॉल रजिस्टर की गई। इसके बाद ज्रेबा [54] 10.29 बजे घटना स्थल पर पहुंच गई। हमारा मकसद अपनी तारीफ करवाना नहीं था। 10.55 बजे एंबुलेंस से इन्हें सफदरगंज अस्पताल पहुंचा दिया गया।

इससे पहले दिल्ली गैंगरेप की घटना के अकेले चश्मदीद अवींद्र पांडे के मुताबिक बस से फेंके जाने के बाद अगले दो घंटे तक न तो पुलिस ने ही उनकी मदद की और न जनता ने। बहादुर बेटी की मौत के बाद पहली बार सामने आए अवींद्र ने बताया कि 16 दिसंबर की रात हुए हादसे के बाद भी उनकी दोस्त का जीवन के प्रति रवैया सकारात्मक था और वह जीना चाहती थीं।

अवींद्र के मुताबिक, घटनास्थल पर पहुंची तीन पीसीआर की गाडिय़ां करीब 45 मिनट तक थानों के सीमा विवाद में ही उलझी रहीं। अवींद्र ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत के दौरान बताया कि घटना के बाद लोग सड़क पर उतरे और पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए। बहुत सी बातें सामने आई, लेकिन लोग उनके अपने-अपने नजरिये से घटना को देख रहे हैं। मैं लोगों को बताना चाहता हूं कि मैंने और मेरी दोस्त ने क्या सहा। साथ ही उम्मीद जताई कि लोग इस घटना से सबक लेते हुए दूसरों की जिंदगी बचा पाएंगे। उन्होंने बताया कि छह आरोपियों ने दोनों को बस के फर्श पर लिटा दिया था।

आरोपियों ने लोहे की रॉड से उनकी पिटाई की। उनके कपड़े और अन्य सामान छीन लिए। पूरी वारदात के बाद दोनों को सुनसान इलाके में फेंक दिया। पांडे ने बताया कि बस के शीशे काले थे और उन पर पर्दे पड़े थे। इससे हम पूरी तरह फंस चुके थे। बस में सवार आरोपियों ने पहले ही पूरी योजना बना ली थी। ड्राइवर और हेल्पर के अलावा बाकी सभी यात्रियों की तरह व्यवहार कर रहे थे। हमने उन्हें किराए के 20 रुपये भी दिए थे। इसके बाद उन्होंने मेरी दोस्त से छेड़छाड़ शुरू कर दी, जिस पर हाथापाई शुरू हो गई। मैंने उनमें से तीन की पिटाई भी की। तभी बाकी आरोपी लोहे की रॉड उठा लाए और मुझे मारना शुरू कर दिया। मेरे बेहोश होने से पहले आरोपी मेरी दोस्त को मुझसे अलग ले गए।

पीडि़ता के दोस्त ने बताया कि बस करीब दो घंटे तक उन्हें लेकर दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती रही। हमने शोर मचाकर लोगों को बताने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने बस की लाइटें भी बंद कर दी थीं। मेरी दोस्त ने मुझे बचाने के लिए आरोपियों से मुकाबला किया। उसने 100 नंबर पर पुलिस से भी संपर्क करने की कोशिश की। तभी आरोपियों ने उससे मोबाइल छीन लिया। उन्होंने बस से फेंकने से पहले हमारे मोबाइल छीनने के अलावा कपड़े भी फाड़ दिए थे। बस से फेंकने के बाद उन्होंने हमें कुचलने की भी कोशिश की, लेकिन मैंने अपनी दोस्त को आखिरी मौके पर खींचकर बचा लिया। इसके बाद मैंने गुजर रहे लोगों को रोकने की काफी कोशिश की। करीब 25 मिनट तक किसी ने अपनी गाड़ी भी नहीं रोकी। हालांकि, कुछ लोगों ने अपनी कार, ऑटो और बाइक धीमी जरूर की, लेकिन बिना मदद किए ही आगे बढ़ गए। तभी गश्त कर रहे किसी पुलिसकर्मी ने रुककर पुलिस को फोन किया।

ढीली पुलिस पर बोलने से बचे शिंदे
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दिल्ली गैंगरेप पीडि़ता के दोस्त के आरोप पर टिप्पणी करने से आज इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि वह तथ्यों को जानने के बाद ही टिप्पणी करेंगे। उन्होंने कहा- मैं इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।  इस पर विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही मैं टिप्पणी करूंगा।  गौरतलब है कि पीडि़ता के दोस्त ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद जब बस से उन्हें फेंक दिया गया था तब दिल्ली पुलिस ने हरकत में आने में सुस्ती दिखाई।

पुलिस को इस घटना के बारे में सूचना मिलने पर उसके शीघ्रता से हरकत में आने के दावों के उलट पीडि़ता के दोस्त ने कहा है कि करीब 45 मिनट के बाद पुलिस की तीन पीसीआर वैन पहुंची और उन्होंने इस बारे में फैसला करने में इस बात को लेकर वक्त बर्बाद किया कि यह मामला किस पुलिस थाने के दायरे में आएगा।

आरोपियों की पेशी सोमवार को
दिल्ली की एक अदालत ने 16 दिसंबर के सामूहिक बलात्कार कांड में पुलिस के आरोपपत्र का आज संज्ञान ले लिया। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नमृता अग्रवाल ने आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए शनिवार को कहा कि आरोपियों के खिलाफ पहली नजर में हत्या और सामूहिक बलात्कार सहित विभिन्न अपराधों का पता चलता है।  सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302(हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 376(2)(जी) (सामूहिक बलात्कार) 377 (अप्राकृतिक अपराध) 395(डकैती), 396 (डकैती के दौरान हत्या), 34 (समान मंशा) और धारा-412 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) के तहत मामला बनता है।

उन्होंने कहा,’मैं आरोपपत्र का संज्ञान लेती हूं और सभी पांच आरोपियों को सात जनवरी को पेश करने के लिए सम्मन जारी करती हूं। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि पांचों आरोपियों राम सिंह, मुकेश, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर को सात जनवरी को पेश किया जाए।

‘जल्दी इलाज मिलने पर बच सकती थी मेरी बहन’

बलिया . दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड का शिकार हुई 23 वर्षीय लड़की के भाई ने शनिवार को कहा कि यदि उसकी बहन को अस्पताल पहुंचाए जाने में विलम्ब न होता तो उसकी जान बच सकती थी, मगर आते-जाते लोगों ने उसकी कोई सहायता नहीं की। अपने गांव में बातचीत में लड़की के भाई ने कहा, ‘मेरी बहन ने मुझे बताया था कि बस से सड़क पर फेंके जाने के बाद उसने उधर से गुजरने वाले लोगों से मदद मांगी थी मगर किसी ने उनकी सहायता नहीं की।

उन्होंने कहा कि उसे सहायता तब मिली जब हाईवे गश्ती पुलिस वाहन ने इस बारे में पुलिस को सूचित किया और उसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। इस बीच दो घंटे गुजर गए और उसके शरीर से काफी रक्त बह गया, जिससे उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई। लड़की के भाई ने उसके साथ हुई वारदात के बाद चले जनआंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि अब जिस तरह की संवेदना दिखाई पड़ रही है, लोगों को उसी तरह अपने व्यवहार और सोच में भी बदलाव लाना होगा, ताकि कोई आदमी समय से सहायता के अभाव में न मर जाए। उन्होंने नई दिल्ली में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में बलात्कार के मामले में मृत्यु दंड की सजा दिए जाने पर आम सहमति नहीं बन पाने पर अफसोस व्यक्त किया, मगर साथ ही यह भरोसा भी जताया कि दिल्ली पुलिस ने उसकी बहन के साथ कांड करने वाले दरिंदो के विरुद्ध जैसा आरोप पत्र दाखिल किया है, उससे उन्हें फांसी की सजा निश्चित है। उन्होंने बताया कि उनकी बहन को फिल्में देखने का शौक था और वह आमिर खान की फैन थी तथा परिवार के लोगों के साथ उसने जो अंतिम फिल्म देखी थी वह ‘तलाश’ थी।

बलात्कारी को मिले मृत्युदण्ड : शिवराज

भोपाल. मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, उत्पीडऩ और बलात्कार, हत्या तथा अन्य जघन्य हिंसात्मक कृत्य में अपराधियों को मृत्युदण्ड देने की सिफारिश की है।

उन्होंने बलात्कार पीडि़त महिला के अधिकारों के संरक्षण के लिये भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं। मुख्यमंत्री ने न्यायमूर्ति जे.एस.वर्मा समिति, नई दिल्ली को राज्य सरकार की ओर से कानूनी प्रावधानों में सुधार की अनुशंसाएँ की हैं। मुख्यमंत्री ने ज्यादती की घटना की विशेष परिस्थितियों की चर्चा करते हुये कहा कि जिन प्रकरणों में ज्यादती की शिकार महिला की हत्या कर दी जाती है, उसे प्राकृतिक और सामान्य जीवन जीने में अक्षम बना दिया जाता है, वह एचआईव्ही या यौन संक्रमण से संक्रमित हो जाती है, ज्यादती की शिकार महिला घटना के एक वर्ष के भीतर आत्महत्या कर ले या उसकी मृत्यु हो जाये, ऐसे प्रकरणों में अपराधी को मृत्युदण्ड मिलना चाहिये।

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