जौनपुर,

देश के जाने-माने वैज्ञानिक और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह लगभग 70 वर्ष के थे।

जौनपुर जिले के सदर तहसील एवं सिकरारा क्षेत्र के कलवारी गांव के निवासी स्व. ठाकुर सूर्य नारायण सिंह के पुत्र डा़ लालजी सिंह का जन्म पांच जुलाई 1947 को हुआ था। इण्टरमीडिएट तक शिक्षा जिले में लेने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिये 1962 में बीएचयू चले गये जहां पर उन्होंने बीएससी, एमएससी और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

वर्ष 1971 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद वह कोलकाता गये, वहां पर साइंस में 1974 तक एक फैलोशिप के तहत रिसर्च किया। इसके बाद वह छह माह की फेलोशिप पर इंग्लैैंड गये और तीन माह की बढोत्तरी लेकर नौ माह बाद वापस भारत आये। जून 1987 में सीसीएमबी हैदराबाद में वैज्ञानिक पद पर कार्य करने लगे और 1998 से 2009 तक वहां के निदेशक रहे।

डॉ0 सिंह 22 अगस्त 2011 से 22 अगस्त 2014 तक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। वह भारत के नामी नू-जीवविज्ञानी थे। लिंग निर्धारण का आणविक आधार, डीएनए फिंगरप्रिंट, वन्यजीव संरक्षण, रेशमकीट जीनोम विश्लेषण, मानव जीनोम एवं प्राचीन डीएनए अध्ययन आदि उनकी रुचि के प्रमुख विषय थे।

वैज्ञानिक और पूर्व कुलपति डॉ0 लाल जी सिंह कल अपरान्ह चार बजे पैतृक आवास कलवारी से हैदराबाद जाने के लिए बाबतपुर एयरपोर्ट पर गये जहां तबियत बिगड़ने के पर उन्हें तत्काल बीएचयू ले जाया गया। बीएचयू में उन्हें डॉ0 धर्मेंद्र जैन की देख रेख में रखा गया। कल रात 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

डॉ0 सिंह ने बीएचयू से ही पढ़ाई की। वहीं के तीन साल तक कुलपति रहे और देर रात वहीं पर अंतिम सांस भी ली। डॉ0 सिंह का पार्थिव शरीर रात में ही उनके घर कलवारी लाया गया, जहां पर आज लोग उनका अंतिम दर्शन कर रहे हैं। उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

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