संतजी के नाम पर किया जाना है नामकरण

संत हिरदाराम नगर,

संत नगर के समाजसेवी और सामाजिक संगठन द्वारा बैरागढ़ का नाम संत हिरदाराम नगर करने को लेकर पहल तो रंग लाई, लेकिन रेलवे स्टेशन का नाम आज दस माह बाद भी अब तक नहीं बदल सका.
सामाजिक संगठन रेलवे स्टेशन का नाम बदलने को लेकर काफी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं.

लेकिन अब तक स्टेशन का नाम नहीं बदल सका. इसको लेकर कई बार घोषणा हो चुकी है. इसके लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु को भी अवगत कराया गया लेकिन नाम नहीं बदला गया.

आज भी स्टेशन पर बैरागढ़ के बोर्ड लगे देखे जा सकते हैं.हर साल संत हिरदाराम साहिब के जन्मदिवस से पहले नामकरण की सौगात देने की बात कही जाती है लेकिन यह बातें हवा में उड़ जाती है. 

केन्द्र सरकार ने भी बैरागढ़ का नाम बदलकर संत हिरदाराम नगर रखा है लेकिन अभी तक बैरागढ़ रेलवे स्टेशन का नाम संत हिरदाराम नगर नहीं किया गया है जबकि इस बावत केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय ने केन्द्र सरकार के सभी विभागों को परिपत्र जारी कर जहां-जहां भी बैरागढ़ नाम अंकित है, उसके स्थान पर संत हिरदाराम नगर किए जाने के निर्देश दिए लेकिन बोर्ड पर नाम आज तक नहीं बदले गए.

2016 में रेल मंत्रालय से हुआ था आदेश जारी

2016 में रेल मंत्रालय के आदेश के बाद बैरागढ़ स्टेशन का नाम संत हिरदाराम नगर के नाम से कर दिया जाना था. आदेश नहीं मिलने से बैरागढ़ जंक्शन लिखे नाम को हटा कर संत हिरदाराम नगर नहीं लिखा गया है.

रेल्वे स्टेशन पर जहां-जहां बैरागढ़ स्टेशन नाम लिखा हुआ है वहां अभी नाम में बदलाव नहीं किया गया है जिसकी वजह से लोगों में अभी भी चिन्ता है. यात्री भी सोच में है कि स्टेशन का नामकरण होने के बाद भी संत हिरदाराम नगर क्यों नहीं किया गया.

8 साल संघर्ष के बाद हुई थी नाम की घोषणा

स्टेशन का नाम संत हिरदाराम साहिब के नाम से करने के लिए 19 सितंबर 2009 को कांग्रेस नेता नेरश ज्ञानचंदानी के आग्रह पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर बैरागढ़ का नाम संत हिरदाराम नगर करने की अपील की थी.

सीएम ने राजस्व विभाग को नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे. लंबे इंतजार के बाद 2013 में बैरागढ़ का नाम संतश्री के नाम करने के आदेश जारी किए गए. बावजूद अब तक रेलवे स्टेशन का नाम संतश्री के नाम पर नहीं हो सका.

इसके बाद कई बार संगठनों के प्रयास के बाद पिछले साल 2016 में संत हिरदाराम के नाम से करने की घोषणा की गई थी जिसके बाद जगह-जगह जशन भी मनाया गया था लेकिन आज तक नाम नहीं बदला गया.

 

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