नयी दिल्ली,  उच्चतम न्यायालय ने अाज एक ऐतिहासिक फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दिया।

मुख्य न्यायाधीश जे एस केहर की अध्यक्षता वाली नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा, “निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार और निजी स्वतंत्रता के अधिकार का मूलभूत हिस्सा है। यह संविधान के भाग-तीन के तहत प्रदत्त आजादी का ही हिस्सा है।”

संविधान पीठ के अन्य सदस्य हैं – न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एम सप्रे, न्यायमूर्ति रोहिंगटन एफ नरीमन, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल तथा न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर।

संविधान पीठ ने इस संबंध में एमपी शर्मा और खड़ग सिंह मामले में शीर्ष अदालत के पू‌र्व के फैसले को भी पलट दिया। खड़ग सिंह मामले में छह-सदस्यीय पीठ ने 1954 में तथा एमपी शर्मा मामले में आठ-सदस्यीय पीठ ने 1962 में व्यवस्था दी थी कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकारों की श्रेणी में नहीं आता है।

अब पांच-सदस्यीय संविधान पीठ आधार मामले की सुनवाई निजता के मौलिक अधिकार के पहलू से करेगी।

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