मध्यप्रदेश में संचालित 1200 निजी कॉलेजों में 40 प्रतिशत ऐसे हैं जहां मानदंडों के अनुसार शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो सकी है. इस विषय में केंद्रीय सरकार के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 2015 में एक परिपत्र जारी किया था जिसके तहत कॉलेजों में ‘कोड- 28’ के तहत शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है. इस कोड के तहत शिक्षक का पी.एच.डी. होना जरूरी है. प्रदेश भर के कॉलेजों में 10 हजार पी.एच.डी. शिक्षकों की जरूरत होगी.

राज्य सरकार ने निजी कॉलेजों को चेतावनी दे दी है जहां निर्धारित योग्यता के शिक्षक नहीं होंगे उन निजी कॉलेजों की मान्यता खत्म हो जाएगी.

निजी कालेज के लिये नया पाठ्यक्रम मुसीबत बन गया है. उन्हें उल्लेखित तकनीकी विषयों के लिये विशेषज्ञ शिक्षक नहीं मिल रहे हैं. उन विषयों के शिक्षक तो हैं लेकिन वे पी.एच.डी. नहीं हैं. इसलिये निजी कालेजों में पढ़ाई नहीं हो सकती है.

पिछले साल सरकार ने 48 ऐसे कालेजों की मान्यता रोक दी है जिनमें समुचित योग्यता के शिक्षक नहीं थे. पिछले साल 250 निजी कालेजों से मान्यता मांगी थी इनमें से 150 स्तरहीन निकले. इस साल 300 निजी कालेजों ने आवेदन किया है जिनका परीक्षण चल रहा है.

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